भारतीय न्यायपालिका: राजनीतिक हस्तक्षेप और सुधार
भारतीय न्यायिक प्रणाली अपने विशाल और जटिल तंत्र के बावजूद आज धीमी गति और मामलों की भारी संख्या के कारण संकट में है। लाखों मामले वर्षों से अदालतों में लंबित हैं, और न्यायाधीशों की कमी ने इस प्रक्रिया को और अधिक बाधित किया है।
भारत की न्यायिक प्रणाली दुनिया के सबसे बड़े और सबसे जटिल न्यायिक तंत्रों में से एक है। देश का संविधान न्यायपालिका को एक स्वतंत्र और निष्पक्ष इकाई के रूप में मान्यता देता है, जिसका मुख्य उद्देश्य संविधान की रक्षा करना और नागरिकों के अधिकारों की सुरक्षा करना है। हालांकि, पिछले कुछ दशकों में न्यायालयों के धीमी गति से काम करने, न्याय में देरी और राजनीतिक हस्तक्षेप जैसे मुद्दों ने इस प्रणाली की…










