Heat Stress In Dairy Animals: गर्मी से वैश्विक दुग्ध उत्पादन में गिरावट, बचाव के लिए अपनाएँ 10 घरेलू नुस्ख़े
देसी नस्लों की तुलना में विदेशी और संकर नस्लों के पशुओं में गर्मी बर्दाश्त करने की क्षमता कम होती है
विश्व के सबसे बड़े दूध उत्पादक देश भारत में गायें गर्मी से परेशान हैं। गर्मी के मौसम में दूध उत्पादन के घटने जैसी समस्या का सामना पशुपालकों को करना पड़ता है। गर्मी और जलवायु परिवर्तन की चुनौतियों की वजह से भारत के पशुपालन विशेषज्ञों की ओर से भी पशुपालकों को अपने दुधारू पशुओं को तेज़ गर्मी और लू से बचाने के लिए अनेक सलाह दी गयी हैं।
तेज़ गर्मी और सूखे (Heat and Drought) के कारण विश्व के कई देशों में दुग्ध उत्पादन में गिरावट (Decline in Milk Production) आ रही है। ऑस्ट्रेलिया, फ्राँस और अमेरिका सहित कई देशों में दुग्ध उत्पादन घटा है। इससे आने वाले समय में मक्खन से लेकर बेबी मिल्क पाउडर तक की कमी होने की आशंका जतायी गयी है। विश्व के सबसे बड़े दूध उत्पादक देश भारत में गायें गर्मी से परेशान हैं।
गर्मी और जलवायु परिवर्तन की चुनौतियों की वजह से भारत के पशुपालन विशेषज्ञों की ओर से भी पशुपालकों को अपने दुधारू पशुओं को तेज़ गर्मी और लू से बचाने के लिए अनेक सलाह दी गयी हैं। इसमें पशुओं के लिए छायादार शेड, कूलर तथा पंखे और पर्याप्त चारा-पानी आदि की व्यवस्था करना शामिल है।
केरल विश्वविद्यालय के एक अध्ययन के अनुसार, यदि मवेशियों के शारीरिक तापमान में 0.5 डिग्री सेल्सियस की बढ़ोतरी होती है तो उनका दैनिक दूध उत्पादन 1.8 से 2 लीटर तक कम हो जाता है। दूसरे शब्दों में कहें तो तापमान में एक डिग्री सेल्सियस की वृद्धि से दुग्ध उत्पादन में 5 प्रतिशत की कमी हो सकती है। गम्भीर ताप तनाव (heat stress) की वजह से पशुओं के शरीर का तापमान, दिल की धड़कनें, रक्त चाप (ब्लड प्रेशर) बढ़ जाता है। चारे का सेवन 35 प्रतिशत तक कम हो सकता है। देसी नस्ल के पशु तो फिर भी ज़्यादा तापमान सहन कर लेते हैं लेकिन विदेशी और संकर नस्लों में इसे बर्दाश्त करने की क्षमता भी कम होती है।
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