गरीब, सजन सलौना राम है, अचल अभंगी पीर । चरण कमल हंसा रहे, हम हैं दामनगीर ।।
उस सज्जन सलौने अचल अभंगी राम जो पीर यानि गुरू रूप में प्रकट होते हैं, के चरण कमल में हंसा रहते हैं। हम उस परमात्मा के साथ ऐसे हैं जैसे चोली दामन का साथ होता है यानि हम उस परमेश्वर के अत्यंत निकट हैं ।
-सतगुरु रामपाल जी महाराज













