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🔱 गुरु प्रदोष व्रत कथा - Guru Pradosh Vrat Katha
जो प्रदोष व्रत गुरुवार के दिन पड़ता है वो गुरु प्रदोष व्रत कहलाता है। गुरुवार प्रदोष व्रत रखने से भक्तों को अपने पूर्वजों का आशीर्वाद मिलता है।
गुरु प्रदोष व्रत कथा | एक बार इन्द्र और वृत्रासुर की सेना में घनघोर युद्ध हुआ। देवताओं ने दैत्य-सेना को पराजित कर नष्ट-भ्रष्ट कर डाला। यह देख वृत्रासुर अत्यन्त क्रोधित हो स्वयं युद्ध को उद्यत हुआ। आसुरी माया से उसने विकराल रूप धारण कर लिया। सभी देवता भयभीत हो गुरुदेव बृहस्पति की शरण में पहूंचे।
..गुरु प्रदोष व्रत कथा को पूरा पाठ करने के लिए नीचे दिए लिंक पर क्लिक करें 👇🏻 📲 https://www.bhaktibharat.com/katha/guru-pradosh-vrat-katha
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🐚 अथ श्री बृहस्पतिवार व्रत कथा | बृहस्पतिदेव की कथा | Shri Brihaspatidev Ji Vrat Katha 📲 https://www.bhaktibharat.com/katha/shri-brihaspatidev-ji-vrat-katha
🔱 गुरु प्रदोष व्रत कथा - Guru Pradosh Vrat Katha
जो प्रदोष व्रत गुरुवार के दिन पड़ता है वो गुरु प्रदोष व्रत कहलाता है। गुरुवार प्रदोष व्रत रखने से भक्तों को अपने पूर्वजों का आशीर्वाद मिलता है।
गुरु प्रदोष व्रत कथा | एक बार इन्द्र और वृत्रासुर की सेना में घनघोर युद्ध हुआ। देवताओं ने दैत्य-सेना को पराजित कर नष्ट-भ्रष्ट कर डाला। यह देख वृत्रासुर अत्यन्त क्रोधित हो स्वयं युद्ध को उद्यत हुआ। आसुरी माया से उसने विकराल रूप धारण कर लिया। सभी देवता भयभीत हो गुरुदेव बृहस्पति की शरण में पहूंचे।
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सावन का पहला प्रदोष व्रत आज, शिव पूजा में इन बातों का रखें ध्यान
चैतन्य भारत न्यूज सावन का पहला प्रदोष व्रत 5 अगस्त को यानी आज है। शास्त्रों में बताया गया है कि जब शनिवार को प्रदोष व्रत पड़ता है तब इस शनि प्रदोष व्रत कहते हैं। प्रदोष व्रत में भगवान शिव की पूजा का महत्व है। कथाओं के अनुसार, प्रदोष तिथि के दिन ही भगवान शिव ने सृष्टि की उत्पत्ति की थी और इसी दिन सृष्टि का विलय भी करेंगे। इस दिन भगवान शिव के साथ शनिदेव की पूजा करने से कई समस्याओं से मुक्ति मिल सकती है। आइए जानते हैं शनि प्रदोष के दिन कौन से उपाय करने चाहिए… प्रदोष व्रत करते समय इन बातों का रखें ख्याल: त्रयोदशी के दिन प्रात:काल सूर्य उदय से पहने उठना चाहिए। सभी कामों से निवृत होकर भोलेनाथ को याद करें। ध्यान रहे कि इस व्रत में खाना नहीं खाया जाता है। पूरा दिन व्रत करें और सूर्यास्त से एक घंटा पहले स्नान करें। इसके बाद श्वेत वस्त्र धारण करें। जहां पूजा करनी है उस स्थान को गंगाजल से शुद्ध करें। फिर गाय के गोबर से मंडप तैयार करें। 5 रंगों का इस्तेमाल कर मंडप पर रंगोली बनाएं। इस व्रत के लिए कुशा का आसान इस्तेमाल किया जाता है। भगवान शंकर की आराधना उतर-पूर्व दिशा की ओर मुख कर ही करनी चाहिए। ऊँ नम: शिवाय का जाप करते हुए भोलेनाथ को जल चढ़ाए। त्रयोदशी तिथि को ही प्रदोष व्रत का उद्यापन करें। श्रावण प्रदोष व्रत का शुभ मुहूर्त त्रयोदशी तिथि प्रारंभ - 5 अगस्त 2021, को शाम 05 बजकर 09 मिनट त्रयोदशी तिथि समाप्त - 6 अगस्त 2021, को शाम 06 बजकर 28 मिनट तक Read the full article
सावन का पहला प्रदोष व्रत आज, शिव पूजा में इन बातों का रखें ध्यान
चैतन्य भारत न्यूज सावन का पहला प्रदोष व्रत 18 जुलाई को यानी आज है। शास्त्रों में बताया गया है कि जब शनिवार को प्रदोष व्रत पड़ता है तब इस शनि प्रदोष व्रत कहते हैं। प्रदोष व्रत में भगवान शिव की पूजा का महत्व है। कथाओं के अनुसार, प्रदोष तिथि के दिन ही भगवान शिव ने सृष्टि की उत्पत्ति की थी और इसी दिन सृष्टि का विलय भी करेंगे। इस दिन भगवान शिव के साथ शनिदेव की पूजा करने से कई समस्याओं से मुक्ति मिल सकती है। आइए जानते हैं शनि प्रदोष के दिन कौन से उपाय करने चाहिए… प्रदोष व्रत करते समय इन बातों का रखें ख्याल: त्रयोदशी के दिन प्रात:काल सूर्य उदय से पहने उठना चाहिए। सभी कामों से निवृत होकर भोलेनाथ को याद करें। ध्यान रहे कि इस व्रत में खाना नहीं खाया जाता है। पूरा दिन व्रत करें और सूर्यास्त से एक घंटा पहले स्नान करें। इसके बाद श्वेत वस्त्र धारण करें। जहां पूजा करनी है उस स्थान को गंगाजल से शुद्ध करें। फिर गाय के गोबर से मंडप तैयार करें। 5 रंगों का इस्तेमाल कर मंडप पर रंगोली बनाएं। इस व्रत के लिए कुशा का आसान इस्तेमाल किया जाता है। भगवान शंकर की आराधना उतर-पूर्व दिशा की ओर मुख कर ही करनी चाहिए। ऊँ नम: शिवाय का जाप करते हुए भोलेनाथ को जल चढ़ाए। त्रयोदशी तिथि को ही प्रदोष व्रत का उद्यापन करें। शुभ मुहूर्त सावन माह के कृष्ण पक्ष की त्रयोदशी तिथि का प्रारंभ 17 जुलाई को देर रात 12 बजकर 33 मिनट से हो रहा है, जो 18 जुलाई की देर रात 12 बजकर 41 मिनट तक रहेगा। प्रदोष व्रत की पूजा हमेशा सूर्यास्त के बाद होती है। ऐसे में इस बार शनि प्रदोष की पूजा शाम 07 बजकर 20 मिनट से रात 09 बजकर 23 मिनट तक की जा सकती है। प्रदोष पूजा के लिए कुल 2 घंटे 03 मिनट का समय मिल रहा है। Read the full article
गुरु प्रदोष व्रत आज, इस विधि से करें भगवान शिव की पूजा, सभी मनोकामनाएं होंगी पूरी
चैतन्य भारत न्यूज इस बार प्रदोष व्रत गुरूवार के दिन है इस कारण इसे गुरु प्रदोष व्रत कहा जाता है। इस व्रत का हिंदू धर्म में काफी महत्व है। मान्यता है कि इस दिन भगवान शिव की आराधना करने से भक्तों को आरोग्य का आशीर्वाद प्राप्त होता है। भगवान शिव अपने भक्तों की सभी मनोकामनाएं पूरी करते हैं। आइए जानते हैं गुरु प्रदोष व्रत का महत्व और पूजा-विधि। (adsbygoogle = window.adsbygoogle || ).push({});
गुरु प्रदोष व्रत का महत्व इस प्रदोष को शत्रुनाशक कहा गया है। जिन लोगों की कुंडली में चंद्रमा कमजोर हो, उन्हें भी ये व्रत अवश्य करना चाहिए। प्रदोष व्रत पर पूजन, जप, दान, व्रत करने से भगवान शिव की आशीर्वाद मिलता है। इसके अलावा यह व्रत जीवन के सारे दुख, संकट दूर करके व्यक्ति को दीर्घायु प्रदान करता है। माना जाता है कि इस दिन भगवान शिव की उपासना करने से सभी प्रकार के पापों से मुक्ति मिल जाती है। इसके अलावा निसंतान दंपत्ति गुरु प्रदोष का व्रत करके उत्तम संतान का वरदान पा सकते हैं।
गुरु प्रदोष व्रत की पूजा-विधि इस दिन सुबह जल्दी उठ जाएं और स्नान कर स्वच्छ कपड़े धारण करें। भगवान श्री भोलेनाथ का स्मरण करें साथ ही व्रत करने का संकल्प लें। पूजा स्थल पर उत्तर या पूर्व दिशा की तरफ मुंह करके बैठना चाहिए। प्रदोष व्रत में शाम के समय पूजा की जाती है। प्रदोष व्रत की आराधना करने के लिए कुशा के आसन का प्रयोग करें। उतर-पूर्व दिशा की ओर मुख करके भगवान शंकर का पूजन करें। पूजा के दौरान भगवान शिव के मंत्र ‘ऊँ नम: शिवाय’ का जाप करते रहे। अंत में प्रदोष व्रत कथा सुनकर शिव जी की आरती उतारें। ये भी पढ़े... शिव की आराधना से मिलेगा विशेष फल, जानिए सोम प्रदोष व्रत का महत्व और पूजा-विधि अश्विन माह में प्रदोष व्रत और शिव पूजा से मिलता है विशेष लाभ, जानिए इसका महत्व और पूजा-विधि विवाह पंचमी के दिन ही हुआ था भगवान राम और माता सीता का विवाह, जानिए व्रत का महत्व और पूजन-विधि Read the full article
गुरु प्रदोष व्रत कथा एवं पूजा विधि 01 July, 2020 | Guru Pradosh Vrat Kat...
गुरु प्रदोष व्रत आज, इस विधि से करें भगवान शिव की पूजा, सभी मनोकामनाएं होंगी पूरी
चैतन्य भारत न्यूज इस बार प्रदोष व्रत गुरूवार के दिन है इस कारण इसे गुरु प्रदोष व्रत कहा जाता है। इस व्रत का हिंदू धर्म में काफी महत्व है। मान्यता है कि इस दिन भगवान शिव की आराधना करने से भक्तों को आरोग्य का आशीर्वाद प्राप्त होता है। भगवान शिव अपने भक्तों की सभी मनोकामनाएं पूरी करते हैं। आइए जानते हैं गुरु प्रदोष व्रत का महत्व और पूजा-विधि। (adsbygoogle = window.adsbygoogle || ).push({});
गुरु प्रदोष व्रत का महत्व इस प्रदोष को शत्रुनाशक कहा गया है। जिन लोगों की कुंडली में चंद्रमा कमजोर हो, उन्हें भी ये व्रत अवश्य करना चाहिए। प्रदोष व्रत पर पूजन, जप, दान, व्रत करने से भगवान शिव की आशीर्वाद मिलता है। इसके अलावा यह व्रत जीवन के सारे दुख, संकट दूर करके व्यक्ति को दीर्घायु प्रदान करता है। माना जाता है कि इस दिन भगवान शिव की उपासना करने से सभी प्रकार के पापों से मुक्ति मिल जाती है। इसके अलावा निसंतान दंपत्ति गुरु प्रदोष का व्रत करके उत्तम संतान का वरदान पा सकते हैं।
गुरु प्रदोष व्रत की पूजा-विधि इस दिन सुबह जल्दी उठ जाएं और स्नान कर स्वच्छ कपड़े धारण करें। भगवान श्री भोलेनाथ का स्मरण करें साथ ही व्रत करने का संकल्प लें। पूजा स्थल पर उत्तर या पूर्व दिशा की तरफ मुंह करके बैठना चाहिए। प्रदोष व्रत में शाम के समय पूजा की जाती है। प्रदोष व्रत की आराधना करने के लिए कुशा के आसन का प्रयोग करें। उतर-पूर्व दिशा की ओर मुख करके भगवान शंकर का पूजन करें। पूजा के दौरान भगवान शिव के मंत्र ‘ऊँ नम: शिवाय’ का जाप करते रहे। अंत में प्रदोष व्रत कथा सुनकर शिव जी की आरती उतारें। ये भी पढ़े... शिव की आराधना से मिलेगा विशेष फल, जानिए सोम प्रदोष व्रत का महत्व और पूजा-विधि अश्विन माह में प्रदोष व्रत और शिव पूजा से मिलता है विशेष लाभ, जानिए इसका महत्व और पूजा-विधि विवाह पंचमी के दिन ही हुआ था भगवान राम और माता सीता का विवाह, जानिए व्रत का महत्व और पूजन-विधि Read the full article