ईश्वरप्राप्ति का मार्ग कभी ना छोड़े
ईश्वरप्राप्ति का मार्ग कभी ना छोड़े
एक मरणियो सोने भारे ।
आखिर तो मरना ही है, तो अभी से मौत को निमंत्रण दे दो । साधक वह है कि जो हजार विघ्न आयें तो भी न रुके , लाख प्रलोभन आएँ तो भी न फँसे । हजार भय के प्रसंग आएँ तो भी भयभीत न हो और लाख धन्यवाद मिले तो भी अहंकारी न हो । उसका नाम साधक है । साधक का अनुभव होना चाहिए कि:
हमें रोक सके ये जमाने में दम नहीं ।
हम से जमाना है जमाने से हम नहीं ॥
प्रहलाद के पिता ने रोका तो प्रहलाद…
View On WordPress









