जब मन नकारात्मक हो तो मौन ही उपाय है
मन की शांति कैसे पाएँ हम जो कुछ भी देखते हैं, उसे हमारा मन अपने अनुभव और धारणा के अनुसार अर्थ देता है। अगर मन नकारात्मक अवस्था में है, तो वही वस्तु, व्यक्ति या घटना हमें नकारात्मक ही प्रतीत होती है। ऐसे समय में मन केवल दोष, कमी और खतरे ढूंढता है। उस समय बोलना या प्रतिक्रिया देना स्थिति को और जटिल बना सकता है। इसलिए ऐसे समय पर मौन रहना ही बुद्धिमानी है। मौन का महत्व मौन का अर्थ पलायन नहीं है, बल्कि यह एक सजग दृष्टा बनने का पहला कदम है। जब हम केवल देखना शुरू करते हैं — बिना बोले, बिना प्रतिक्रिया दिए — तो मन धीरे-धीरे शांत होने लगता है। ऐसा इसलिए होता है क्योंकि मन को अपनी धारणा को मजबूत करने के लिए हमारी भागीदारी चाहिए। जितना हम उसके अनुसार बोलते हैं, प्रतिक्रिया देते हैं, उतना ही मन उस विचार को और मज़बूत करता है।
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