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जेईई-एडवांस्ड,2023 में हैदराबाद के वी. सी. रेड्डी ऑल इंडिया टॉपर
रिजल्टः कुल 1,80,372 परीक्षार्थियों में से 43,773 हुये क्वालिफाई , इस वर्ष रिजल्ट 24.26 प्रतिशत रहा, जबकि गत वर्ष रिजल्ट 26.17 प्रतिशत था। अरविंद न्यूजवेव @ कोटा आईआईटी गोवाहाटी (IIT-G) द्वारा रविवार को घोषित जेईई-एडवांस्ड (JEE-Advanced 2023) रिजल्ट में हैदराबाद के छात्र वाविलाला चिदविलास रेड्डी ऑल इंडिया टॉपर रहे। उसे 360 मे ंसे 241 अंक प्राप्त हुये हैं। गर्ल्स केटेगरी में हैदराबाद जोन से छात्रा नयाकांति नाग भव्यश्री ऑल इंडिया टॉपर रही। उसने 360 में से 298 अंक प्राप्त किये है। देशभर के कोचिंग संस्थानों एवं परीक्षार्थियों द्वारा रिजल्ट देखने का क्रम जारी है। इस वर्ष 4 जून को देश के 221 शहरों के परीक्षा केंद्रों पर कुल 1,80,371 परीक्षार्थियों ने जेईई-एडवांस्ड परीक्षा दी थी, जिसमें से 43,773 क्लालिफाई घोषित किये गये। इनमें 36,204 छात्र एवं 7,509 छात्रायें हैं। इस वर्ष कुल परीक्षार्थियों की संख्या पिछले वर्ष से 24,834 अधिक होने से 3061 परीक्षार्थी अधिक सफल हुये हैं। हालांकि रिजल्ट 24.26 प्रतिशत रहा, जबकि गत वर्ष रिजल्ट 26.17 प्रतिशत था। इस वर्ष जेईई-मेन से कुल 1.93 लाख विद्यार्थी जेईई-एडवांस्ड के लिये क्वालिफाई किये गये थे, जिसमें से 1,80,371 लाख स्टूडेंट्स ने ही यह परीक्षा दी। जोसा काउंसलिंग सोमवार से शुरू ज्वाइंट सीट एलोकेशन कमेटी (JOSAA) द्वारा ऑनलाइन काउंसलिंग प्रक्रिया सोमवार 19 जून से प्रारंभ कर दी जायेगी। जेईई-एडवांस्ड में क्वालिफाई 43,773 विद्यार्थियों को देश की 23 आईआईटी की 16,598 (2022 के अनुसार) से अधिक सीटों पर प्रवेश दिये जायेंगे। जेईई-एडवांस्ड के स्कोर से 23 IIT, 32 NIT, 26 IIIT, 35 GFTI सहित 117 संस्थानों के विभिन्न कोर्सेस में प्रवेश मिलेंगे। 7509 बेटियां क्वालिफाई 23 आईआईटी की 3276 सीटें (20.06 %) गर्ल्स के लिये सुपर न्यूमरेरी आधार पर आरक्षित हैं। गत वर्ष 35,124 में से 6516 गर्ल्स जेईई-एडवांस्ड में चयनित हुई थी। इस वर्ष 7509 गर्ल्स सफल रही जो गत वर्ष से 993 अधिक हैं। यह रही कटऑफ जेईई-एडवांस्ड,2023 में सामान्य वर्ग (CRL) की कुल कटऑफ 23.89 प्रतिशत व विषयवार 6.83 प्रतिशत रही। ओबीसी (OBC-NCL) एवं सामान्य EWS वर्ग में कटऑफ 21.50 प्रतिशत व विषयवार 6.15 प्रतिशत रही। एससी, एसटी व दिव्यांग वर्ग की कटऑफ 11.95 प्रतिशत व विषयवार 3.42 प्रतिशत है। रिजल्ट के अनुसार, इस वर्ष सामान्य वर्ग को 360 में से 86, ओबीसी व ईडब्ल्यूएस को 77, एससी, एसटी व दिव्यांग वर्ग को 43 अंकों पर काउसंलिंग के लिये क्वालिफाई घोषित किया गया है। हैदराबाद जोन से सर्वाधिक सलेक्शन इस प्रवेश परीक्षा में आईआईटी के 7 जोन में हैदराबाद जोन से सर्वाधिक 10,432 स्टूडेंट्स, दिल्ली जोन से 9,290, मुंबई जोन से 7957,खडगपुर जोन से 4618, कानपुर जोन से 4582, रूडकी जोन से 4499, गुवाहाटी जोन से 2395 स्टूडेंट्स क्वालिफाई हुये हैं। टॉप-10 में 6 हैदराबाद जोन से AIR 1: वी. सी. रेड्डी IIT, हैदराबाद जोन AIR 2: रमेश सूर्य थेजा, IIT, हैदराबाद जोन AIR 3: ऋषि कालरा, IIT,रूडकी जोन AIR 4: राघव गोयल, IIT रूडकी जोन AIR 5: ए.वेंकट शिवराम, IIT हैदराबाद जोन AIR 6: प्रभाव खंडेलवाल, IIT,दिल्ली जोन AIR 7: बी.अभिनव चौधरी, IIT, हैदराबाद जोन AIR 8: मलय केडिया, IIT, दिल्ली जोन AIR 9: एनबी रेड्डी, IIT हैदराबाद जोन AIR10 : वाई वेकट मनेंद्र रेड्डी, IIT हैदराबाद Read the full article
Back to ground.... #virralpost😉❤️❤️ #callmemg #callme_maas_ #grouund #iitguwahati #karnataka #yuvasangam #reels (at IIT Guwahati) https://www.instagram.com/p/CpINd0xIu4W/?igshid=NGJjMDIxMWI=
हड्डी फ्रैक्चर के प्रभावी उपचार के लिये IIT गुवाहाटी ने विकसित की नई तकनीक
न्यूजवेव @ नई दिल्ली भारतीय शोधकर्ताओं ने ऐसी नई तकनीक विकसित की है जिससे यह आकलन कर सकते हैं कि पैर की हड्डी का फ्रैक्चर सर्जरी के बाद कैसे और किस सीमा तक ठीक हो सकता है। आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) सिमुलेशन मॉडल पर आधारित यह तकनीक सर्जरी के बाद जाँघ की हड्डी के फ्रैक्चर में उपयोगी हो सकती है। साथ ही, यह तकनीक फ्रैक्चर उपचार के लिए सर्जरी से पहले सही इम्प्लांट या तकनीक चुनने में भी मदद करेगी। शोधकर्ताओं का कहना है कि विभिन्न फ्रैक्चर निर्धारण रणनीतियों के उपचार परिणामों का आकलन करने के लिए इस तकनीक का उपयोग हो सकता है। इससे रोगी के विशिष्ट शारीरिक गठन और फ्रैक्चर प्रकार के आधार पर इष्टतम रणनीति का चयन किया जा सकता है। यह अध्ययन आईआईटी, गुवाहाटी के शोधकर्ताओं द्वारा किया गया है। यह अध्ययन, आर्थोपेडिक्स में सटीक और प्रभावी निर्णय लेने की दर में सुधार करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है, जिससे फ्रैक्चर रिकवरी से जुड़ी लागत और बीमारी का बोझ कम करने में मदद मिल सकती है। विभिन्न उपचार विधियों के बाद फ्रैक्चर रिकवरी की प्रक्रिया को समझने के लिए शोधकर्ताओं ने परिमित तत्व विश्लेषण, एआई टूलऔर फजी लॉजिक के संयोजन का उपयोग किया है। इसके लिए विशिष्ट सिमुलेशन के साथ-साथ अस्थि-विकास मापदंडों का उपयोग किया गया है। फ्रैक्चर उपचार क्षमता की तुलना के लिए हड्डियों को स्थिरता प्रदान करने वाले स्क्रू आधारिततंत्र के प्रभाव की पड़ताल भी की गई है। शोधकर्ताओं का कहना है कि टूटी हड्डियों में सुधार के संबंध में एआई मॉडल के आकलन प्रयोगात्मक अवलोकन के अनुरूप पाये गए हैं, जो इसकी विश्वसनीयता को दर्शाते हैं।
आईआईटी गुवाहाटी के सूत्रों ने बताया कि इस सटीक मॉडल का उपयोग उपचार के समय को कम कर सकता है, और उन रोगियों के लिए आर्थिक बोझ और दर्द को कम कर सकता है, जिन्हें जांघ के फ्रैक्चर के उपचार की आवश्यकता होती है। विभिन्न जैविक और रोगी-विशिष्ट मापदंडों के अलावा, यह एआई मॉड्यूल धूम्रपान और मधुमेह जैसे घटकों को भी आकलन प्रक्रिया में शामिल कर सकता है। आईआईटी (IIT) गुवाहाटी के डिपार्टमेंट ऑफ बायोसाइंस में असिस्टेंट प्रोफेसर डॉ सौप्तिक चंदा और उनके शोध छात्र प्रतीक नाग का यह अध्ययन शोध पत्रिका प्लस वन में प्रकाशित किया है। डॉ सौप्तिक चंदा बताते हैं कि ‘‘जटिल जैविक घटनाओं को समझने और उनका आकलन करने में एआई प्रभावी रूप से सक्षम है, इसीलिए, स्वास्थ्य विज्ञान अनुप्रयोगों में यह तकनीक एक बड़ी भूमिका निभा सकती है।‘‘ उम्रदराज लोगों की बढ़ती आबादी के साथ दुनियाभर में जाँघ की हड्डी और कूल्हे के फ्रैक्चर की घटनाएं बढ़ी हैं। अकेले भारत में हर साल 2 लाख हिप फ्रैक्चर होते हैं, जिनमें से अधिकांश को अस्पताल में भर्ती होने और ट्रॉमा केयर की आवश्यकता होती है। शोधकर्ताओं की योजना इस एल्गोरिदम के आधार पर एक सॉफ्टवेयर ऐप विकसित करने की है, जिसका उपयोग अस्पतालों और अन्य स्वास्थ्य संस्थानों में उनके फ्रैक्चर उपचार प्रोटोकॉल के हिस्से के रूप में किया जा सकता है। पशुओं पर अध्ययन के जरिये मापदंडों में सुधार के लिए शोधकर्ता पूर्वोत्तर इंदिरा गांधी क्षेत्रीय स्वास्थ्य और चिकित्सा विज्ञान अस्पताल, शिलांग के डॉ. भास्कर बोरगोहेन एवं हड्डी रोग विशेषज्ञों की उनकी टीम के साथ मिलकर कार्य कर रहे हैं। (इंडिया साइंस वायर) Read the full article
A foundation created by the Shri Ram Education Trust in 2001 founded Greater Noida Institute of Technology.