#WorldPoetryDay📝 !! ज़हन-ओ-जिगर-जीस्त !! मैंने अपने ज़हन-ओ-जिगर-जीस्त से, खुरच खुरच कर, तुम्हारी यादों को मिटाया, और बैठा ही था, अपनी आराम कुर्सी पर, कि जो निशान रह गये थे, ज़हन-ओ-जिगर-जीस्त पर, वो साजिशन मिल गये, आपस में, और ठीक वहीं पर, उभर आया तुम्हारा चेहरा, वैसे ही जैसे बचपन में, हम तुम बादलों की भीड़ में, शक्लें तलाशते थे, तो दिख जाते थे, कभी फूल, कभी नन्ही सी परी, कभी कोई घोड़ा, तो कभी गिलहरी, लेकिन कभी भी, कोई टूटा हुआ दिल नहीं दिखा, नहीं? ~दिलीप पांडेय #WorldPoetryDay #PoetryDay #HindiLiterature #HindiPoetry #Poetry #Nazm #NaiWaliHindi #NaiKavita #ShareIt #SpreadIt












