रेलवे स्टेशन का बंद कमरा
मेरा नाम अमित देशमुख है।उस समय मेरी उम्र 32 साल थी और मैं नागपुर की एक प्राइवेट कंस्ट्रक्शन कंपनी में साइट सुपरवाइज़र के तौर पर काम करता था।काम की वजह से मुझे अक्सर छोटे शहरों और कस्बों में जाना पड़ता था,जहाँ ट्रेनें कम रुकती हैं और सुविधाएँ उससे भी कम होती हैं।ये घटना उसी दौर की है,जब एक साइट मीटिंग के लिएमुझे अकेले रात में सफ़र करना पड़ाऔर एक अनजान रेलवे स्टेशन पर रुकना मेरी मजबूरी बन गई।
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