‼️ धर्मेण हीनः पशुभिः समानः।
📍 धर्म ही सच्ची मानवता का प्रतीक है
📍 सच्ची मानवता धर्म के पालन में निहित है। केवल कर्मकांड करना ही धर्म नहीं, बल्कि सत्य, अहिंसा, प्रेम और सेवा भाव से जीवन जीना ही असली धर्म है। जब व्यक्ति धर्महीन हो जाता है, तो उसमें संवेदनशीलता और नैतिकता की कमी हो जाती है, जिससे समाज में अशांति और अशिष्टता फैलती है। धर्म हमें सही और गलत का भेद समझाकर जीवन को सच्ची राह पर ले जाता है। इसलिए, धर्म को जीवन का अभिन्न अंग बनाना चाहिए।
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