कोई भी मनुष्य समाज में दो तरह की संगति पाता है, एक अच्छे लोगों की और दूसरी बुरे लोगों की। जहां अच्छे लोगों की संगति उसका उद्धार करती है तो वहीं बुरे और नीच लोगों के साथ रहकर व्यक्ति का विनाश हो जाता है।
जैसे स्वाति नक्षत्र में बरसी पानी की एक बूंद यदि केले के गर्भ में चली जाए, तो मोती बन जाती है। समुन्द्र की सीपी में पड़ जाए तो मोती बन जाती है, लेकिन यदि सर्प के मुंह में चली जाए तो विष बन जाती है। ठीक उसी प्रकार से मनुष्य यदि अच्छे लोगों की संगति में रहता है तो अच्छा बनता है। वहीं बुरे लोगों के साथ उठता बैठता है, तो उसमें अवगुण आते हैं।








