किरदार
आज का जो खेला है वह तो बस यही मेला है मन में जो आता है कह दे दिल में तो आता है कर दे
जब कुछ नहीं होता है तो सबकुछ होता है जब थोड़ा सा आ जाता है तो कम ही होता है
यह प्यास बुझने वाली नही है कितना भी पी ले यह पेट भरने वाला नही है कितना भी खा ले
कुछ लोगों को अकेले रहना नही आता है क्योकि वह दूसरों की नज़रों से खुद को देखते हैं आप आप नही, किरदार हैं भूलिये अपने आप को, फिर आप असरदार हैं ~ राहुल सिंह










