पहले जब भी घर से निकलता था तो हड़बड़ी रहती थी ट्रेन छुटने का डर होता था तो आटो वाले से लड़ना पड़ता था जल्दी चलो-जल्दी चलो सुनकर आटो वाला नाराज हो जाता था और कहता कि एकदम टाईम देखकर निकलते हैं थोड़ा जल्दी निकला किजिए केवल आपको लेकर तो मैं जाऊंगा नही वो सही था ऐसा करते मैने और भी बहोत सारे लोगों को देखा है जल्दीचलो जल्दीचलो और जब वो चल देता तो थोड़ा तेजचलो तेजचलो। रेलवे स्टेशन पहुचते ही टिकट के लिए लम्बी लाइन देखकर गुस्सा आता है तभी कोई बगल से जाकर टिकट ले लेता है और जब आप विरोध करते है तो वो आपको आंखे दिखाता है तो कभी कोई महिला टिकट के लिए आ जाती इस दौरान हम कभी टिकट मास्टर को गाली दे रहे होते तो कभी उस आदमी को जो अपनी पत्नी से टिकट निकलवा लेता । ट्रेन के आते ही लोग चढ़ना शुरु कर देते है कुछ लोग उतरते भी हैं खुब धक्का मुक्की होती है शारीरिक तौर पर भी जुबानी भी उसके बाद गेट लगभग एक मिनट खाली रहता है सीट पर बैठने के लिए लोग कमजोर और बिमार हो जाते हैं दस रुपये का मुंगफली खरीदकर अगर आपने विक्रेता से उसका वजन पुछ लिया तो आपको कमर कसना पड़ेगा चलती ट्रेन से उतरना बहादुरी का काम है आप रुकने का इंतजार करते है तो आपको पीछे वाले के बहादुरी का शिकार होना पड़ता है। आटो वाला आगे चार लोगों को बैठाता है पीछे तीन लोगों को आपने आगे बैठने से इनकार किया तो पिछड़ जाएंगे और आगे आधा बैठ जाते है पाँच लोगों से ज्यादा क्यों बैठा रहे हो ये पुछने पर आटो वाला देश के भ्रस्टाचार गिना देता है इस तरह हम बनारस पहुंचते हैं जिंदा। आज बनारस मे एक पुल गिर गया सैकड़ो मारे गए। *बालसखा संदीप की दीवार से*😢 #Varanasi #BridgeCollapsed #BanarasTragedy #Benaras #WhoWillAnswer













