वाणी:- स्वाद चक्र ब्रह्मादि बासा, जहां सावित्री ब्रह्मा रहैं। ॐ जाप जपंत हंसा, ज्ञान जोग सतगुरु कहैं।। सरलार्थ:- मूल चक्र से एक इन्च ऊपर स्वाद कमल है। इस कमल में सावित्री तथा ब्रह्मा जी का निवास है। इस कमल को विकसित करने के लिए ओम् (ॐ) नाम का जाप कर। यह भेद परमेश्वर कबीर जी ने मुझे (संत गरीबदास जी से) सतगुरू रूप में प्रकट होकर कहा है।















