चुनाव 2014-शूद्रों के साथ धोखा आज सुबह से चुनाव परिणाम पर हमारी नज़र लगी हुई है। सुबह देखा कि भाजपा की चार सीट्स के साथ बसपा की भी एक सीट लीडिंग में है। देख कर मन बहुत खुश हुआ, लेकिन जैसे जैसे समय बीतता गया सारी उम्मीदे धरी की धरी रह गई। उसके बाद हमारी टीम की तत्काल मीटिंग बुलाई गई और विचार विमर्श किया गया कि आखिर मूलनिवासी समाज की सभी राजनीतिक पार्टियों का हश्र इतना बुरा क्यों हुआ? आखिर कहा कमी है जिसके कारण मूलनिवासी राजनीतिक पार्टियों को लोक सभा की एक भी सीट नसीब नहीं हुई। जैसे जैसे विचार मंथन होता गया हर बात सामने आ गई। हमारी टीम ने पाया कि इस हार के पीछे दो प्रमुख कारण रहे। पहला मूलनिवासियों का हिंदू धर्म के प्रति मोह और दूसरा मूलनिवासी पार्टियों के नेताओं का घटियापन, ना समझी और बिकाउपन। आप लोगों को भी कोई और कारण लगे, जिसके कारण मूलनिवासी समाज लोक सभा से बहार हो गया। तो कृपया हमे जरुर बताये। जहा तक हमे लगता है मूलनिवासियों के मन में जब तक ये धर्म और कर्म का झूठा डर बैठा हुआ है तब तक मूलनिवासी ब्राह्मणवाद से बाहर नहीं निकल सकते। हमारी हार का सबसे बड़ा कारण धर्म ही है। जब तक मूलनिवासी इस धर्म नाम के छलावे से बाहर नहीं आयेंगे, हिंदू देवी देवताओं और भगवानों की सचाई से वाफिक नहीं होंगे तक तक ये ब्राह्मणवादी ऐसे ही मूलनिवासियों पर राज करते रहेंगे। मूलनिवासी समाज के गुरुओं, पीरों और संतों के पास इस का कोई उत्तर नहीं है कि मूलनिवासी समाज को ब्राह्मणवादी भगवानों से कैसे दूर किया जाये। लेकिन आज हम अपने लक्ष्यों में एक और लक्ष्य जोडने का संकल्प कर रहे है। आज से हम देश में जगह जगह भीम राव जी अम्बेडकर के आश्रम या शिक्षण संस्थान खोलेंगे। जहा कोई घंटियाँ नहीं बजाई जाएँगी, कोई आरती नहीं होगी, कोई धुप दीप नहीं होगा, लेकिन मूलनिवासियों को उसी आश्रम में आकर बाबा साहब की मूर्ति के आगे खड़े होकर प्रार्थना करनी होगी। उन शिक्षण संस्थानों में देश के मूलनिवासियों को बाबा साहब जी के विचारों से अवगत करवाएंगे। जहाँ किसी धर्म की नहीं अम्बेडकरवाद की शिक्षा दी जायेगी। हमारा मानना है दुनिया की सभी समस्याओं का हल सिर्फ अम्बेडकरवाद में ही छुपा हुआ है। बाबा कांशी राम जी का कैडर सिस्टम तो हमारी टीम ने पहले ही अपना रखा है लेकिन अब उस पर और ज्यादा ध्यान देने की जरुरत है।ताकि मूलनिवासियों के मन से ब्राह्मणवादी भगवानों का डर दूर हो सके, ताकि मूलनिवासी समाज के लोग झूठे, पाखंडी और वाहियात देवी देवताओं के सच को समझे और ब्राह्मणवाद के खिलाफ खड़े हो सके। मूलनिवासी राजनितिक पार्टियों के इन घटिया नेताओं को भी समय के साथ बदलना पड़ेगा। पिछले दिनों पता चला की मायावती भी बिक चुकी है और आज यह साबित भी हो गया। अगर मायावती बिकी नहीं होती तो उन्होंने मोदी की तरह 300-400 रैलियां क्यों नहीं की? इतनी सारी सीट्स पर ब्राह्मणों और राजपूतों को खड़ा करने की क्या जरुरत थी? मायावती कांशी राम जी और बाबा साहब अम्बेडकर जी के विचारों को कैसे भूल गई? बाबा साहब और कांशी राम जी ने अपने जीते जी कभी किसी ब्राह्मणवादी के आगे सिर नहीं झुकाया, कभी कोई समझोता नहीं किया तो मायावती में इतनी हिम्मत कैसे आ गई कि वो मूलनिवासियों के वोटों का, मूलनिवासियों के विश्वास का सौदा ब्राह्मणों और राजपूतों से करे? क्या यह मायावती की मूलनिवासियों को सता दिलाने के स्थान पर सता ब्रहामणों को सौपने की साजिश नहीं? ऐसे बहुत से प्रश्न खड़े जिनका अभी तक कोई जबाब नहीं मिल पाया है। ये सिर्फ मायावती की बात नहीं है। दूसरे मूलनिवासी राजनीतिक दलों का हाल तो इससे भी बुरा है। सभी राजनीतिक पार्टियों को मूलनिवासी समाज ने ऐसी लात मारी है जिसकी चोट से मूलनिवासी समाज आने वाले कई सालों तक उभर नहीं सकेगा। शुद्र संघ आज फिर सभी मूलनिवासियों से अपील करता है। हमारी वेबसाइट को पढ़े, ब्राह्मणवादियों की सचाई हर मूलनिवासी तक पहुंचाओ। अपने अपने सदस्यता फॉर्म ऑनलाइन भर कर भेजे। शुद्र संघ से जुड़े, और देश के कोने कोने में शुद्र संघ की इकाइयों का गठन करे। अपनी इकाइयों की जानकारी हमे भेजे। और हर रोज तीन से चार घंटे शुद्र संघ को दे अर्थात उन घंटों में चार-पांच मूलनिवासियों को समझाए कि आखिर देश में हो क्या रहा है और हमे क्या करना है।भूल जाओ की आपका जाति क्या है, भूल जाओ की आपका धर्म क्या है। पेरियार जी के शब्दों में “धर्म और भगवान को तब तक भूल जाओ, जब तक हमे आज़ादी नहीं मिलती”।जब तक देश में मूलनिवासी शासन व्यवस्था स्थापित नहीं होती तब तक धर्म और भगवान को भूल जाओ। जब देश में मूलनिवासियों की सरकार होगी तब हम अपने आप अपना धर्म चुन लेंगे।