कलम उठाई थी आज बड़े अरसे बाद, सोचा था कुछ नया लिखेंगे, कम्भख्त फिर से तेरा नाम लिख बैठे, हम तो मोहब्बत के ज़ज़ हुए साहब, ...
कलम उठाई थी आज बड़े अरसे बाद, सोचा था कुछ नया लिखेंगे, कम्भख्त फिर से तेरा नाम लिख बैठे, हम तो मोहब्बत के ज़ज़ हुए साहब, अपनी ही मौत लिखकर कलम तोड़ बैठे |












