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इस अनोखे मंदिर में धनतेरस से बंटता है 'खाजाना', सिर्फ 4 दिन के लिए खुलते हैं कपाट
चैतन्य भारत न्यूज वाराणसी. दुनिया भर में ऐसे कई मंदिर हैं जो अपने आप में बहुत खास होते हैं। इन्हीं में से एक उत्तर प्रदेश के वाराणसी में है जो दुनिया भर में प्रसिद्द है। गंगा के पश्चिमी घाट पर भगवान शिव के बारह ज्योर्तिलिंग में से एक विश्वेश्वर ज्योतिर्लिंग, काशी विश्वनाथ का मंदिर है। (adsbygoogle = window.adsbygoogle || ).push({});
इसी मंदिर के निकट दक्षिण दिशा में मां अन्नपूर्णा देवी का मंदिर है जो भक्तों को अन्न-धन प्रदान करने वाली मां अन्नपूर्णा का दिव्य धाम है। यह देश का एकमात्र अन्नपूर्णा का मंदिर है जहां धनतेरस से अन्नकूट तक मां का खजाना बांटा जाता है। यहां से मिले सिक्के और धान का लावा लोग तिजोरी और पूजा स्थल पर रखते हैं। मान्यता है कि ऐसा करने से पूरे वर्ष धन-अन्न की कमी नहीं होती।
खास बात यह है कि मां अन्नपूर्णा का यह मंदिर वर्ष भर में मात्र चार दिनों के लिए धनतेरस से खोला जाता है। चंद रेजगारी और धान के लावे को पाने के लिए पूरा-पूरा दिन लोग इंतजार में बिता देते हैं। इसके बाद जब मां अन्नपूर्णा के जब स्वर्णिम दर्शन भक्तों को मिलते हैं तो उनकी सारी थकान मानो गायब हो जाती है।
पुराणों में काशी के भावी नामों में काशीपीठ नाम का भी उल्लेख है। स्कन्दपुराण के ‘काशीखण्ड’ में ये लिखा है कि भगवान विश्वेश्वर महादेव गृहस्थ हैं और भवानी उनकी गृहस्थी चलाती हैं। काशी उनका परिवार है। काशीवासियों के योग-क्षेम का भार इन्हीं पर है। ये भी पढ़े... इस शिव मंदिर में हजारों लीटर जल चढ़ाने के बावजूद बाहर नहीं आता जल, दिन में तीन बार रंग बदलते हैं महादेव ये है भारत का सबसे रहस्यमयी मंदिर, जहां हवा में लटके हैं खंभे, रामायण काल से जुड़े हैं तार मां दुर्गा के इस अनोखे मंदिर में बलि के बाद भी जिंदा रहते हैं बकरे, नहीं बहता रक्त Read the full article
છપ્પન ભોગ અન્નકૂટ ભક્તિની એક શત- પ્રીત છે.વ્રજમાં વૃષભાનુએ નંદરાવના પરિવાર સમસ્ત વ્રજમંડળને પોતાને ત્યાં શ્રી કૃષ્ણ અને રાધિકાજીના વિવાહ પ્રસંગે સાંકેત નામના સ્થાનમાં છપ્પન ભોગનું ભોજન કરાવ્યું ત્યારથી હવેલીઓમાં છપ્પનભોગ થાય છે.