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विजया एकादशी के व्रत-पूजन से मिलती है, विजयश्री
फाल्गुन कृष्ण एकादशी को विजया एकादशी कहा जाता है। इस व्रत के प्रभाव से मनुष्य को जीवन में विजयश्री की प्राप्ति होती है। 26 फरवरी, 2022 शनिवार को विजया एकादशी है। पौराणिक मान्यता के अनुसार भगवान राम के वनवासकाल में जब राक्षसराज रावण द्वारा सीता जी का हरण हो जाता है तो भगवान राम और उनके भाई लक्ष्मण सीता के वियोग में दुखी होकर वन-वन भटकते हैं और जब उन्हें पता चलता है कि सीता का अपहरण करके रावण उन्हें लंका ले गया है तो वह लंका जाकर राक्षसों का संहार करने का मन में निश्चय करते हैं। लंका जाने के लिये उनके मार्ग में समुद्र बाधा बनता है। दुर्गम सागर को पार कर लंका जाकर राक्षसों का संहार करके सीता जी को वापस लाने के लिये वे ऋषि-मुनियों से उपाय पूछते हैं।
ऋषि-मुनियों ने समुद्र पार कर लंका विजय के लिये भगवान राम को विधि पूर्वक फाल्गुन कृष्ण एकादशी के व्रत-पूजन को करने को कहा हैं। ऋषि-मुनियों के कथनानुसार भगवान राम अपने भाई लक्ष्मण और सेना सहित विजया एकादशी का व्रत-पूजन करते हैं। इस व्रत-पूजन के पुण्य प्रभाव से वे समुद्र पार कर लंका में राक्षसों का संहार कर विजय प्राप्त करते हैं। अतः जीवन में विजय-विभूति प्राप्ति के लिये व्यक्ति को फाल्गुन कृष्ण एकादशी का व्रत-पूजन अवश्य करना चाहिये।
इस वर्ष विजया एकादशी दिनांक 26 फरवरी, 2022 दिन शनिवार को मनायी जाएगी। ऐसे में भगवान नारायण की उपासना हेतु परमपूज्य सद्गुरु श्री सुधांशु जी महाराज के आशीर्वाद से आप लोगों की सेवा में ‘‘युगऋषि पूजा एवं अनुष्ठान केन्द्र’’ द्वारा विविध मन्त्रनुष्ठान आयोजित किए जा रहे हैं, जिनका लाभ आप लोग अवश्य प्राप्त करें।









