जय श्रीकृष्ण..
जय श्रीराधे... शास्त्र कहते हैं कि...आकाश, वायु, अग्नि, जल, पृथ्वी, नक्षत्र, प्राणी, दिशाएँ, वृक्ष-वनस्पति, नदियाँ, समुद्र आदि जो कुछ भी इस सृष्टि में व्याप्त है...सब ईश्वर का ही रूप है....और हरिरूप समझकर... ऐसी भावना मानकर हमें अनन्य भाव से इन्हें प्रणाम करना चाहिए और इनका मान सम्मान करना चाहिए।
खं वायुमग्निं सलिलं महीं च
ज्योतींषि सत्त्वानि दिशो द्रुमादीन्।
सरित्-समुद्रांश्च हरेः शरीरं
यत्-किं-च भूतं प्रणमेदनन्यः॥
- श्रीमद्भागवत महापुराण
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