भारत की रेटिंग में कटौती के बाद मूडीज ने मंगलवार को भारत की 8 गैर वित्तीय कंपनियों और तीन बैंकों की रेटिंग भी घटा दी है। 8 कंपनियों में इन्फोसिस, टीसीएस, ओएनजीसी जैसे बड़ी कंपनियां शामिल हैं तो देश के सबसे बड़े सरकारी बैंक एसबीआई, एचडीएफसी और एक्जिम बैंक की रेटिंग भी घटाई है। इसके साथ ही मूडीज ने इन्फ्रास्ट्रक्चर के क्षेत्र में काम करने वाली सात कंपनियों की भी रेटिंग एक पायदान घटा दी है जिनमें एनटीपीसी, एनएचएआई, गेल और अडाणी ग्रीन एनर्जी जैसी कंपनियां शामिल हैं। आईआरएफसी और हुडको की रेटिंग में भी एक पायदान की कमी की गई है। मूडीज पर बीजेपी का हमला भारतीय जनता पार्टी के सांसद निशिकांत दूबे ने प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी से वैश्विक रेटिंग एजेंसियां मूडीज, फिच और एस एण्ड पी के खिलाफ तुरंत कार्रवाई करने का आग्रह किया है। उन्होंने आरोप लगाया है कि ये एजेंसियां ''चीन की साजिश के तहत भारतीय अर्थव्यवस्था को अस्थिर करने का प्रयास कर रही हैं। दूबे ने प्रधानमंत्री को लिखे पत्र में कहा है कि बेशक ये एजेंसियां अमेरिका में स्थित हैं, लेकिन चीन ने अपने रणनीतिक हित को देखते हुये इन कंपनियों में काफी बड़ा निवेश किया है।मूडीज का तर्क मूडीज ने कहा कि कोरोना वायरस महामारी की वजह से अर्थव्यवस्था में आई बाधा और भारत की सॉवरेन रेटिंग घटाए जाने की वजह से मंगलवार को इन कंपनियों की रेटिंग में कटौती की गई है। मूडीज ने इससे पहले सोमवार को 22 साल में पहली बार भारत की साख को 'बीएए2 से घटाकर 'बीएए3 कर दिया। यह रेटिंग सबसे निचला निवेश गस्त हैं। इससे एक पायदान नीचे कबाड़ रेटिंग होती है।मूडीज ने कहा है, ''ओएनजीसी, एचपीसीएल, आयल इंडिया लिमिटेड, इंडियन आयल कार्पोरेशन लिमिटेड, बीपीसीएल, पेट्रोनेट एलएनजी, टीसीएस और इन्फोसिस- इन सभी आठ गैर- वित्तीय क्षेत्र की कंपनियों की दीर्घकालिक 'इश्युअर रेटिंग को घटा दिया गया है। इन सभी रेटिंग के लिये परिदृश्य नकारात्मक है। रेटिंग एजेंसी ने हालांकि रिलायंस इंडस्ट्रीज लिमिटेड की रेटिंग को बरकरार रखा है लेकिन उसके लिये परिदृश्य को स्थिर से बदलकर नकारात्मक कर दिया है। बैंकों के मामले में मूडीज ने एचडीएफसी बैंक और स्टेट बैंक की दीर्घकालिक स्थानीय और विदेशी मुद्रा जमा रेटिंग को बीएए2 से घटाकर बीएए3 कर दिया।भगवान नहीं है मूडीज बीजेपी सांसद निशिकांत दूबे ने कहा है कि ये रेटिंग एजेंसियां ऐसे व्यवहार करती हैं जैसे ये भगवान हैं और हमारे देश को तीसरे दर्जे का देश मानती हैं। इसलिए भारत की सावरेन रेटिंग को लगातार नीचे रखा जाता है। दुबे ने कहा कि इन एजेंसियों ने देश की सही वित्तीय मजबूती को कभी विचार में नहीं लिया। भारत के जीडीपी के समक्ष ऋण का अनुपात काफी कम है, इसे कभी तवज्जो नहीं दी गई। इसी प्रकार कई अन्य कारक भी रहे हैं, जिन पर एजेंसियां गौर नहीं करतीं हैं। भाजपा के सांसद ने कहा कि भारतीय कंपनियों के लिये बैंकों से कर्ज लेने के लिए इन एजेंसियों की रेटिंग लेने की अनिवार्यता को समाप्त कर दिया जाना चाहिए।बता दें कि मूडीज ने बैंक ऑफ बड़ौदा, बैंक ऑफ इंडिया, केनारा बैंक और यूनियन बैंक ऑफ इडिया की दीर्घकालिक स्थानीय और विदेशी मुद्रा जमा रेटिंग और उनके बीसीए की भी समीक्षा कर रही है।