"बॉस के ऑफ़ डे पर आने पर ताने, हमारे ऑफ़ डे पर बुलावा — ऑफिस की कड़वी हकीकत"
पूरा साल मैंने नौकरी को पूरी लगन और समर्पण से निभाया। कभी भी 12 घंटे से कम काम नहीं किया, हर दिन मेहनत की, पर बॉस कहते हैं — "अब तो सही से काम करोगे।"
और जब बॉस खुद 12 घंटे ऑफिस में रहते हैं तो पूरे ऑफिस को बताते हैं, "मैंने तो आज 12 घंटे काम किया!"
"जब कभी किसी वजह से बॉस को अपने ऑफ़ डे पर ऑफिस आना पड़ता है, तो हमें फटकार लगती है, और फिर वही बॉस हमें हमारे ऑफ़ डे पर बुला लेते हैं। ऐसा लगता है जैसे नियम सिर्फ नीचे वालों के लिए होते हैं।"
क्या ये वही ऑफिस राजनीति नहीं है जहाँ मेहनत करने वाले को नीचा दिखाया जाता है, और सियासत करने वालों को छूट दी जाती है?












