When admission time is near, people enquire a lot about schools and their syllabus. Every board has a few advantages, but parents must choos
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CBSC बोर्ड परीक्षा 2021 कोरोना की वजह से रद्द हो सकती है 12वीं की बोर्ड परीक्षा
CBSC बोर्ड परीक्षा 2021 कोरोना की वजह से रद्द हो सकती है 12वीं की बोर्ड परीक्षा
पीटीएन – केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड बारहवीं कक्षा की परीक्षा को रद्द कर सकता है। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, शिक्षा मंत्रालय कोरोना वायरस की वजह से पैदा हुई वर्तमान स्थिति की समीक्षा कर रहा है और बोर्ड परीक्षा को रद्द करने पर विचार कर रहा है। बताया जा रहा है कि सीबीएसई द्वारा अगले दो सप्ताह के भीतर बोर्ड परीक्षा रद्द करने की घोषणा की जा सकती है। इसे लेकर समीक्षा की जा रही है। शिक्षा…
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Delhi News: Important news for millions of students, schools will open in
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Epistemo is one of the Top CBSE Schools in Hyderabad, Gachibowli. Epistemo provides the CBSE curriculum at the Primary level.
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809 Students From Across The Country Pleaded With The Supreme Court To Postpone Compartment Examinations - देशभर के 809 छात्रों ने सुप्रीम कोर्ट से कंपार्टमेंट परीक्षाएं स्थगित करने की लगाई गुहार, सीजेआई को लिखा पत्र
809 Students From Across The Country Pleaded With The Supreme Court To Postpone Compartment Examinations – देशभर के 809 छात्रों ने सुप्रीम कोर्ट से कंपार्टमेंट परीक्षाएं स्थगित करने की लगाई गुहार, सीजेआई को लिखा पत्र
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अमर उजाला नेटवर्क, नई दिल्ली। Updated Thu, 13 Aug 2020 12:57 AM IST
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देशभर के 809 छात्रों ने लेटर पिटिशन दाखिल कर चीफ जस्टिस एसए बोबडे और सुप्रीम कोर्ट के अन्य जजों से सीबीएसई द्वारा 10वीं और 12वीं के लिए कंपार्टमेंट परीक्षा लेने के निर्णय पर स्वत:…
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निजी प्रकाशकों की किताबों पर सीबीएसई बोर्ड का प्रतिबंध उचित नहीं, केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड पहले खुद अपनी किताबें उपलब्ध कराने की करें पूर्ण व्यवस्था
केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड सीबीएसई ने 2016-17 के स्कूली शिक्षण सत्र में साफ कर दिया है कि इस सत्र से यदि निजी स्कूलों ने अभिभावकों व बच्चों पर निजी प्रकाशकों की किताब खरीदने के लिये दबाव बनाया तो उनकी खैर नहीं। बोर्ड ने स्कूलों से कहा है कि मूल्यांकन का आधार अब राष्ट्रीय शैक्षिक अनुसंधान और प्रशिक्षण परिषद एनसीईआरटी व सीबीएसई की किताबें हैं तो निजी प्रकाशकों की किताबों को पढ़ाने का क्या औचत्य है। यदि बाजार में इनकी कमी है तो ई पाठशाला डाॅट एनआईसी डाॅट इन व ई सीबीएसई से किताबों को निः शुल्क डाउनलोड कर सकते हैं। निरंतर महंगी होती शिक्षा और उसका अभिभावकों पर पड़ते आर्थिक भार को ध्यान में रखकर सोचे तो केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड का यह निर्णय सहीं है। लेकिन सवाल यह उठता है कि हर साल जिस सिलैबस की किताबों को लगाने की बात शिक्षा बोर्ड सीबीएसई कर रही है पहले नियमित रूप से बच्चों को वो किताबे उपलब्ध कराने की व्यवस्था तो वो करें। क्योंकि देखने में यह आता है कि लगभग हर वर्ष ही सरकारी किताबों को लेकर बच्चे परेशान रहते हंै ओर इससे पढाई भी प्रभावित होती है। रही बात ई पाठशाला डाॅट एनआईसी डाॅट इन व ई सीबीएसई से किताबों को निशुल्क डाउनलोड करने की तो मैं इन साइडों को तो नहीं कहता मगर ज्यादातर सरकारी विभागों की साइर्डों के सर्वर डाउन मिलते हैं या उनमे वायरस आया होता है अथवा ऐसे ही अन्य और कमियां जैसे जब भी आप इन्हे खोलोगे साइड तो देखने पढ़ने या सुनने को मिलेगा भी अभी साइड पर काम चल रहा है ऐसी परिस्थितियों में सिलैबस डाउनलोड करना बड़ी टेढी खीर होती है क्योंकि कोई एक पन्ना तो होता नहीं जो एक मिनट में डाउनलोड हो जाये। सभी किताबों को डाउनलोड करने के लिये पूरा समय चाहिये। फिर उसकी बाइंडिंग करानी होती है जो किसी आम आदमी के लिये आसान नहीं होता है। इसलिये पहले सरकार पूरा सिलैबस आसानी से अभिभावकों को उपलब्ध कराने की पूर्ण व्यवस्था करें और बाद में उसे जो आदेश किये हैं उन पर उसे काम करना चाहिये। वरना केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड का निर्णय तानाशाही पूर्ण ही कहा जा सकता है बच्चों और उनके अभिभावकों के हित का नहीं। बताया जाता है किसी एक प्रदेश के माननीय न्यायालय द्वारा ऐसे एक मामले में आम आदमी के मौलिक अधिकारों को दृष्टिगत रख सरकार के आदेशों पर रोक लगाने की बात कहीं गई है। इसमे कितनी सच्चाई है यह तो जानकार ही जान सकते हैं मगर यह कहने में मुझे भी कोई हर्ज महसूस नहीं होता कि वर्तमान समय में हर क्षेत्र में आयी जागरूकता के चलते ओर मानव अधिकारों को प्राथमिकता दिये जाने के दौरान यह कहां की तूक है कि सीबीएसई बोर्ड के एसी कमरो में बैठे अधिकारी इस संदर्भ में पूरी जमीनी जानकारी प्राप्त करने से पूर्व चाय की चुसकियों में आदेश कर दे कि यह पढ़ना होगा या नही। मेरा मानना है कि हर व्यक्ति को अपने हिसाब से उपयोगी राष्ट्रहित व देश के विकास में योगदान देने में सक्षम पढ़ाई बचपन से लेकर उच्च स्तर तक करने का अधिकार होना चाहिये की वो सरकारी किताब पढ़ेगा या प्राईवेट, हां यह जरूर है कि जिस स्कूल में वो पढ़ता है वो जिस बोर्ड द्वारा संचालित हो और वहां स्कूल द्वारा जो किताबे पढाई जाती है अगर सरकार उन्हे उपलबध कराने में समक्ष है तो ठीक नही तो निजी प्रकाशकों की किताबें पढ़ने और पढाने में मेरी निगाह में कोई हर्ज नहीं है हां सरकार को इतना जरूर करना चाहिये कि निजी प्रकाशकों पर इतना अंकुश जरूर हो कि जो किताबे वो छाप रहा है उसकी किमत बच्चो से उचित ली जाए। ऐसा न हो की एक रूपये कीमत की किताब के 100 रूपये वसूल किये जाए। सीबीएसई बोर्ड के अधिकारियों को यह भी समझना चाहिये कि वर्तमान में सबको न्यायलय जाने व अपनी बात कहने का अधिकार है हिटलर शाही किसी भी रूप में किसी पर भी चलाना संभव नहीं है। इसलिये बोर्ड के अधिकारी सोच समझकर ऐसे मामलो में यह निर्णय लें जिनका ज्यादा विरोध किसी भी स्तर पर न हों जिससे बच्चों और अभिभावकों को भी प्रभावित न होना पडे।