चालवा
गांव के बाहर, सूखी नदी के पार, एक पुराना रास्ता था…जिस पर लोग दिन में भी कम ही जाते थे।कहते थे—उस रास्ते पर कोई “चलता” है…पर उसके पैरों की आवाज नहीं आती।कुछ साल पहले एक आदमी वहां से गुजर रहा था।सुबह उसका बस्स शरीर मिला—आंखें खुली हुई… जैसे उसने कुछ देखा हो,पर चेहरा बिल्कुल खाली।उसके बाद से ही…लोग उस रास्ते को “चालवा” कहने लगे।
Read more














