देवस्थानम एक्ट: सुब्रहमण्यम स्वामी की याचिका पर हाईकोर्ट में अब छह जुलाई को होगी सुनवाई
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नैनीताल
Updated Sat, 04 Jul 2020 12:06 AM IST
पढ़ें अमर उजाला ई-पेपर
कहीं भी, कभी भी।
*Yearly subscription for just ₹249 + Free Coupon worth ₹200
नैनीताल हाईकोर्ट ने भारतीय जनता पार्टी के राज्यसभा सदस्य सुब्रहमण्यम स्वामी की ओर से उत्तराखंड चारधाम देवस्थानम एक्ट को निरस्त करने को लेकर दायर जनहित याचिका पर सुनवाई के बाद मामले की अगली सुनवाई के लिए छह जुलाई की तिथि नियत की है। मुख्य न्यायाधीश रमेश रंगनाथन एवं न्यायमूर्ति आरसी खुल्बे की खंडपीठ के समक्ष वीडियो कांफ्रेसिग के माध्यम से मामले की सुनवाई हुई।
सुनवाई में रुलक संस्था के अधिवक्ता ने अपना पक्ष रखा। रुलक संस्था की ओर से कोर्ट में मनुस्मृति पेश की गई, जिसके अध्याय सात में कहा गया कि राजा खुद सर्वोपरि हैं। वह अपने दायित्व किसी को भी सौंप सकते हैं। संस्था की ओर से एटकिंसन का गजेटियर भी पेश किया गया, जिसमें कहा गया कि बदरीनाथ मंदिर में क्रप्शन है, इसलिए यहां एडमिनिस्ट्रेशन की जरूरत है।
संस्था ने मदन मोहन मालवीय की ओर से 1933 में लोगों से की गई अपील भी कोर्ट में पेश की। इसके बाद सेक्यूलर मैनेजमेंट और रिलिजियस एक्ट 1939 में लाया गया, जिसमें सेक्यूलर मैनेजमेंट ऑफ टेंपल राज्य को दिया गया था, जबकि रिलिजियस मैनेजमेंट मंदिर पुरोहित को दिया गया है। संस्था ने अयोध्या मंदिर का निर्णय भी कोर्ट में पेश किया, जिनमें सुप्रीम कोर्ट ने भी माना कि गजेटियरों को भी साक्ष्य के रूप में माना जा सकता है। संस्था की ओर से कहा गया कि जो नया एक्ट राज्य सरकार द्वारा लाया गया है इसमें कहीं भी हिन्दू धर्म की भावनाएं आहत नहीं होती हैं।
मामले के अनुसार राज्य सभा सांसद सुब्रमण्यम स्वामी की ओर से हाईकोर्ट में जनहित याचिका दायर कर कहा गया था कि प्रदेश सरकार द्वारा चारधाम के मंदिरों के प्रबंधन को लेकर लाया गया देवस्थानम बोर्ड अधिनियम अंवैधानिक है। देवस्थानम बोर्ड के माध्यम से सरकार द्वारा चारधाम और 51 अन्य मंदिरों का प्रबंधन लेना संविधान के अनुच्छेद 25 व 26 का उल्लंघन है। संस्था ने इस जनहित याचिका का विरोध करते हुए कहा है कि चारधाम यात्रियों की सुविधाओं को ध्यान में रखते हुए राज्य सरकार ने देवस्थानम बोर्ड अधिनियम बनाकर चारधाम व अन्य मंदिरों का प्रबंध लिया है। इससे कहीं भी हिंदू धर्म की भावनाएं आहत नहीं होती हैं। लिहाजा, सुब्रहमण्यम स्वामी की ओर से दायर याचिका पूरी तरह से निराधार है।
नैनीताल हाईकोर्ट ने भारतीय जनता पार्टी के राज्यसभा सदस्य सुब्रहमण्यम स्वामी की ओर से उत्तराखंड चारधाम देवस्थानम एक्ट को निरस्त करने को लेकर दायर जनहित याचिका पर सुनवाई के बाद मामले की अगली सुनवाई के लिए छह जुलाई की तिथि नियत की है। मुख्य न्यायाधीश रमेश रंगनाथन एवं न्यायमूर्ति आरसी खुल्बे की खंडपीठ के समक्ष वीडियो कांफ्रेसिग के माध्यम से मामले की सुनवाई हुई।
सुनवाई में रुलक संस्था के अधिवक्ता ने अपना पक्ष रखा। रुलक संस्था की ओर से कोर्ट में मनुस्मृति पेश की गई, जिसके अध्याय सात में कहा गया कि राजा खुद सर्वोपरि हैं। वह अपने दायित्व किसी को भी सौंप सकते हैं। संस्था की ओर से एटकिंसन का गजेटियर भी पेश किया गया, जिसमें कहा गया कि बदरीनाथ मंदिर में क्रप्शन है, इसलिए यहां एडमिनिस्ट्रेशन की जरूरत है।
संस्था ने मदन मोहन मालवीय की ओर से 1933 में लोगों से की गई अपील भी कोर्ट में पेश की। इसके बाद सेक्यूलर मैनेजमेंट और रिलिजियस एक्ट 1939 में लाया गया, जिसमें सेक्यूलर मैनेजमेंट ऑफ टेंपल राज्य को दिया गया था, जबकि रिलिजियस मैनेजमेंट मंदिर पुरोहित को दिया गया है। संस्था ने अयोध्या मंदिर का निर्णय भी कोर्ट में पेश किया, जिनमें सुप्रीम कोर्ट ने भी माना कि गजेटियरों को भी साक्ष्य के रूप में माना जा सकता है। संस्था की ओर से कहा गया कि जो नया एक्ट राज्य सरकार द्वारा लाया गया है इसमें कहीं भी हिन्दू धर्म की भावनाएं आहत नहीं होती हैं।
मामले के अनुसार राज्य सभा सांसद सुब्रमण्यम स्वामी की ओर से हाईकोर्ट में जनहित याचिका दायर कर कहा गया था कि प्रदेश सरकार द्वारा चारधाम के मंदिरों के प्रबंधन को लेकर लाया गया देवस्थानम बोर्ड अधिनियम अंवैधानिक है। देवस्थानम बोर्ड के माध्यम से सरकार द्वारा चारधाम और 51 अन्य मंदिरों का प्रबंधन लेना संविधान के अनुच्छेद 25 व 26 का उल्लंघन है। संस्था ने इस जनहित याचिका का विरोध करते हुए कहा है कि चारधाम यात्रियों की सुविधाओं को ध्यान में रखते हुए राज्य सरकार ने देवस्थानम बोर्ड अधिनियम बनाकर चारधाम व अन्य मंदिरों का प्रबंध लिया है। इससे कहीं भी हिंदू धर्म की भावनाएं आहत नहीं होती हैं। लिहाजा, सुब्रहमण्यम स्वामी की ओर से दायर याचिका पूरी तरह से निराधार है।
from WordPress https://hindi.khabaruttarakhandki.in/%e0%a4%a6%e0%a5%87%e0%a4%b5%e0%a4%b8%e0%a5%8d%e0%a4%a5%e0%a4%be%e0%a4%a8%e0%a4%ae-%e0%a4%8f%e0%a4%95%e0%a5%8d%e0%a4%9f-%e0%a4%b8%e0%a5%81%e0%a4%ac%e0%a5%8d%e0%a4%b0%e0%a4%b9%e0%a4%ae%e0%a4%a3/