இந்திய அலுவல் மொழியாக சமஸ்கிருதத்தை வலியுறுத்தினார் அம்பேத்கர்: தலைமை நீதிபதி போப்டே
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वोटिंग का अधिकार मौलिक नहीं: CJI बोबडे ने कहा, वोट देने का अधिकार हमारा मौलिक अधिकार नहीं; याचिका करने वाले वकील को लगाई फटकार
वोटिंग का अधिकार मौलिक नहीं: CJI बोबडे ने कहा, वोट देने का अधिकार हमारा मौलिक अधिकार नहीं; याचिका करने वाले वकील को लगाई फटकार
Ads से है परेशान? बिना Ads खबरों के लिए इनस्टॉल करें दैनिक भास्कर ऐप नई दिल्ली26 मिनट पहले कॉपी लिंक सुप्रीम कोर्ट के चीफ जस्टिस एसए बोबडे ने बुधवार को वोटिंग को मौलिक अधिकार मानने से इंकार कर दिया। उन्होंने इसे मौलिक अधिकार बताने वाले वकील काे जमकर फटकार लगाई। वकील सीआर जया सुकीन की याचिका पर सुनवाई के दाैरान यह वाकया पेश आया। याचिकाकर्ता ने ईवीएम के बजाय मतपत्र से मतदान कराने के लिए सरकार और…
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वोटिंग का अधिकार मौलिक नहीं: CJI बोबडे ने कहा, वोट देने का अधिकार हमारा मौलिक अधिकार नहीं; याचिका करने वाले वकील को लगाई फटकार
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Ads से है परेशान? बिना Ads खबरों के लिए इनस्टॉल करें दैनिक भास्कर ऐप नई दिल्ली25 मिनट पहले कॉपी लिंक सुप्रीम कोर्ट के चीफ जस्टिस एसए बोबडे ने बुधवार को वोटिंग को मौलिक अधिकार मानने से इंकार कर दिया। उन्होंने इसे मौलिक अधिकार बताने वाले वकील काे जमकर फटकार लगाई। वकील सीआर जया सुकीन की याचिका पर सुनवाई के दाैरान यह वाकया पेश आया। याचिकाकर्ता ने ईवीएम के बजाय मतपत्र से मतदान कराने के लिए सरकार और…
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Chief Justice of India SA Bobde trying a Harley Davidson motorcycle in Maharashtra. . Justice Bobde was seen in a t-shirt and a pair of sneakers on the limited edition Harley Davidson CVO 2020 in his hometown of Nagpur on Sunday. . The Harley Davidson CVO 2020 is priced at more than Rs 51 lakh, features a nearly 2000cc V-Twin engine, weighs more than 400 kilograms. . The 64-year-old Justice Bobde has often talked his love for motorcycles and said he once had a Bullet, which is manufactured by Royal Enfield. . . Justice Bobde had suffered a broken ankle after an accident while test driving a high-end Harley Davidson bike last year. The accident had kept him away from court duties as well as the Supreme Court Collegium meetings for some time. . . . #cjibobde #chiefjusticeofindia #harleydavidson #bike https://www.instagram.com/p/CCA_UUwHPsu/?igshid=19j3sq445m64g
निर्भया के दोषियों की फांसी पर पीएम मोदी की प्रतिक्रिया आई सामने, कहा- न्याय की जीत हुई
चैतन्य भारत न्यूज नई दिल्ली. निर्भया सामूहिक दुष्कर्म के मामले में चारों दोषियों मुकेश सिंह (32), पवन गुप्ता (25), विनय शर्मा (26) और अक्षय कुमार सिंह (31) को शुक्रवार सुबह साढ़े पांच बजे फांसी के फंदे पर लटकाया गया। अपराधियों को फांसी होने के बाद आम जनता से लेकर बॉलीवुड सेलेब्स तक सभी ने सोशल मीडिया पर अपनी-अपनी प्रतिक्रिया साझा की। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी ट्वीट कर कहा- 'आज न्याय की जीत हुई।' (adsbygoogle = window.adsbygoogle || ).push({}); पीएम मोदी का ट्वीट दोषियों की फांसी पर पीएम मोदी ने अपने ट्वीट में लिखा कि, 'न्याय की जीत हुई, महिलाओं की गरिमा और सुरक्षा को सुनिश्चित करना सर्वोच्च प्राथमिकता है। हमारी नारी शक्ति ने हर क्षेत्र में उत्कृष्ट प्रदर्शन किया है। हमें मिलकर एक ऐसे राष्ट्र का निर्माण करना है, जहां महिला सशक्तीकरण पर ध्यान दिया जाए, जहां समानता और अवसर पर जोर हो।' Justice has prevailed. It is of utmost importance to ensure dignity and safety of women. Our Nari Shakti has excelled in every field. Together, we have to build a nation where the focus is on women empowerment, where there is emphasis on equality and opportunity. — Narendra Modi (@narendramodi) March 20, 2020 अब कोई दूसरी निर्भया न बनें: केजरीवाल वहीं, दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने कहा, 'सात साल बाद, निर्भया के दोषियों को फांसी दी गई। आज एक ऐसा दिन है, जब प्रण लेने की जरूरत है कि अब कोई दूसरी निर्भया न बनें। पुलिस, कोर्ट, राज्य सरकार, केंद्रीय सरकार-सभी यह मिलकर प्रण लें कि हम सिस्टम की खामियों को दूर करेंगे और किसी भी बेटी के साथ ऐसा नहीं होने देंगे।' सात साल बाद आज निर्भया के दोषियों को फाँसी हुई आज संकल्प लेने का दिन है- कि अब दूसरी निर्भया नहीं होने देंगे। पुलिस, कोर्ट, राज्य सरकार, केंद्र सरकार - सबको संकल्प लेना है कि हम सब मिलकर सिस्टम की ख़ामियों को दूर करेंगे और भविष्य में किसी बेटी के साथ ऐसा नहीं होने देंगे pic.twitter.com/OhsNaMAKq9 — Arvind Kejriwal (@ArvindKejriwal) March 20, 2020 दोषी कानून से बच नहीं सकते केंद्रीय महिला एवं बाल विकास मंत्री स्मृति ईरानी ने दोषियों को फांसी दिए जाने पर कहा कि, 'मैंने इतने सालों में निर्भया की मां का संघर्ष देखा है। हालांकि न्याय पाने में समय लगा लेकिन आखिरकार न्याय हुआ। यह लोगों को भी संदेश है कि वे आप कानून से भाग सकते हैं लेकिन आप हमेशा के लिए इससे बच नहीं सकते। मुझे खुशी है कि न्याय हुआ।' पोस्टमार्टम के लिए भेजा गए शव बता दें दोषियों को फांसी देने के करीब 30 मिनट बाद तक उनके शव को तख्ते पर लटकता रहा। सुबह 6 बजे डॉक्टर ने जांच की और चारों दोषियों को मृत घोषित कर दिया। इसके बाद उनके शव को पोस्टमार्टम के लिए दीन दयाल अस्पताल भेज दिया गया है। ये भी पढ़े... निर्भया केस: फांसी घर में जमीन पर लेट गए थे दोषी, जानें सजा-ए-मौत के दो घंटे पहले क्या-क्या हुआ निर्भया के चारों दोषियों को एक साथ दी गई फांसी, 7 साल बाद देश की बेटी को मिला इंसाफ पीढ़ियों से लोगों को फांसी दे रहा है यह जल्लाद परिवार, भगत सिंह-कसाब को भी फंदे पर लटका चुका है 7 साल बाद भी झकझोर कर रख देता है निर्भया कांड, जानें उस काली रात की पूरी कहानी निर्भया केस: दोषी विनय ने कहा-हमें फांसी देने से यदि बलात्कार रुक जाएं तो लटका दो Read the full article
निर्भया केस: फांसी घर में जमीन पर लेट गए थे दोषी, जानें सजा-ए-मौत के दो घंटे पहले क्या-क्या हुआ
चैतन्य भारत न्यूज नई दिल्ली. देश की बेटी निर्भया को 7 साल 3 महीने बाद आखिर न्याय मिल गया। निर्भया दुष्कर्म मामले के चारों दोषियों को आज सुबह 5:30 बजे फांसी की सजा दे दी गई है। दोषी पवन गुप्ता, विनय शर्मा, मुकेश सिंह और अक्षय कुमार सिंह को तिहाड़ जेल में फांसी दी गई। उनके शव को पोस्टमार्टम के लिए दीन दयाल अस्पताल भेज दिया गया है। आइए जानते हैं फांसी के पहले जेल में क्या-क्या हुआ- (adsbygoogle = window.adsbygoogle || ).push({}); दोषियों के जीवन के आखरी लम्हें चारों को तिहाड़ की जेल नंबर 3 में रखा गया। इनमें एक वार्ड नंबर 1 में, दूसरा वार्ड नंबर 7 की सेल में और बाकी दो को नंबर 8 सेल में रखा गया था। रात में चारों दोषियों में से सिर्फ मुकेश और विनय ने ही रात का खाना खाया, लेकिन पवन और अक्षय ने खाना नहीं खाया। चारों दोषियों की रात बेचैनी में गुजरी। सुबह सवा तीन बजे इन्हें जगाया गया। हालांकि, चारों रातभर नहीं सो पाए। करीब 4 बजे दोषियों से नहाने और प्रार्थना के लिए बोला गया, लेकिन उन्होंने इनकार कर दिया। फिर 4:30 बजे इन्हें चाय दी गई, लेकिन इन चारों ने चाय पीने से भी मना कर दिया और न ही नाश्ता किया। इसके बाद पवन जल्लाद ने सुबह 5 बजे दोषियों को काले रंग की पोशाक पहनाई। इस दौरान पुलिस वालों की मदद से इन सबके हाथ पीछे की ओर बांध दिए गए। फिर तिहाड़ जेल में पूरी तरह लॉकडाउन किया गया था। जेल के बाहर अर्धसैनिक बल भारी संख्या में तैनात किए गए थे। फांसी घर पहुंचते ही चारों दोषी जमीन पर लेट गए। वो रोने लगे और माफी मांगने लगे। फिर जेल अधिकारियों की मदद से उन्हें आगे ले जाया गया। सुबह करीब 5:30 बजे चारों अपराधियों के गले में रस्सी की गांठ को सतर्कता से कस दिया। फिर जेल सुपरिटेंडेंट ने इशारा किया तो जल्लाद ने लीवर खींच दिया गया। फांसी के बाद चारों का शव करीब 30 मिनट तक तख्ते पर लटकता रहा। 6 बजे डॉक्टर ने जांच की और चारों दोषियों पवन, अभय, मुकेश और विनय को मृत घोषित कर दिया। क्या है नियम सुप्रीम कोर्ट की गाइडलाइन के अनुसार, फांसी के बाद अपराधियों की शव का पोस्टमार्टम कराना जरूरी होता है। पोस्टमार्टम के बाद शव को परिजनों को सौंपा जाएगा या नहीं यह जेल सुपरिटेंडेंट के तय करता है। यदि जेल सुपरिटेंडेंट को लगता है कि अपराधी के शव का गलत इस्तेमाल हो सकता है तो वह परिजनों को शव देने से इनकार कर सकता है। ये भी पढ़े... निर्भया के चारों दोषियों को एक साथ दी गई फांसी, 7 साल बाद देश की बेटी को मिला इंसाफ पीढ़ियों से लोगों को फांसी दे रहा है यह जल्लाद परिवार, भगत सिंह-कसाब को भी फंदे पर लटका चुका है 7 साल बाद भी झकझोर कर रख देता है निर्भया कांड, जानें उस काली रात की पूरी कहानी निर्भया केस: दोषी विनय ने कहा-हमें फांसी देने से यदि बलात्कार रुक जाएं तो लटका दो Read the full article
निर्भया केस: फांसी घर में जमीन पर लेट गए थे दोषी, जानें सजा-ए-मौत के दो घंटे पहले क्या-क्या हुआ
चैतन्य भारत न्यूज नई दिल्ली. देश की बेटी निर्भया को 7 साल 3 महीने बाद आखिर न्याय मिल गया। निर्भया दुष्कर्म मामले के चारों दोषियों को आज सुबह 5:30 बजे फांसी की सजा दे दी गई है। दोषी पवन गुप्ता, विनय शर्मा, मुकेश सिंह और अक्षय कुमार सिंह को तिहाड़ जेल में फांसी दी गई। उनके शव को पोस्टमार्टम के लिए दीन दयाल अस्पताल भेज दिया गया है। आइए जानते हैं फांसी के पहले जेल में क्या-क्या हुआ- (adsbygoogle = window.adsbygoogle || ).push({}); दोषियों के जीवन के आखरी लम्हें चारों को तिहाड़ की जेल नंबर 3 में रखा गया। इनमें एक वार्ड नंबर 1 में, दूसरा वार्ड नंबर 7 की सेल में और बाकी दो को नंबर 8 सेल में रखा गया था। रात में चारों दोषियों में से सिर्फ मुकेश और विनय ने ही रात का खाना खाया, लेकिन पवन और अक्षय ने खाना नहीं खाया। चारों दोषियों की रात बेचैनी में गुजरी। सुबह सवा तीन बजे इन्हें जगाया गया। हालांकि, चारों रातभर नहीं सो पाए। करीब 4 बजे दोषियों से नहाने और प्रार्थना के लिए बोला गया, लेकिन उन्होंने इनकार कर दिया। फिर 4:30 बजे इन्हें चाय दी गई, लेकिन इन चारों ने चाय पीने से भी मना कर दिया और न ही नाश्ता किया। इसके बाद पवन जल्लाद ने सुबह 5 बजे दोषियों को काले रंग की पोशाक पहनाई। इस दौरान पुलिस वालों की मदद से इन सबके हाथ पीछे की ओर बांध दिए गए। फिर तिहाड़ जेल में पूरी तरह लॉकडाउन किया गया था। जेल के बाहर अर्धसैनिक बल भारी संख्या में तैनात किए गए थे। फांसी घर पहुंचते ही चारों दोषी जमीन पर लेट गए। वो रोने लगे और माफी मांगने लगे। फिर जेल अधिकारियों की मदद से उन्हें आगे ले जाया गया। सुबह करीब 5:30 बजे चारों अपराधियों के गले में रस्सी की गांठ को सतर्कता से कस दिया। फिर जेल सुपरिटेंडेंट ने इशारा किया तो जल्लाद ने लीवर खींच दिया गया। फांसी के बाद चारों का शव करीब 30 मिनट तक तख्ते पर लटकता रहा। 6 बजे डॉक्टर ने जांच की और चारों दोषियों पवन, अभय, मुकेश और विनय को मृत घोषित कर दिया। क्या है नियम सुप्रीम कोर्ट की गाइडलाइन के अनुसार, फांसी के बाद अपराधियों की शव का पोस्टमार्टम कराना जरूरी होता है। पोस्टमार्टम के बाद शव को परिजनों को सौंपा जाएगा या नहीं यह जेल सुपरिटेंडेंट के तय करता है। यदि जेल सुपरिटेंडेंट को लगता है कि अपराधी के शव का गलत इस्तेमाल हो सकता है तो वह परिजनों को शव देने से इनकार कर सकता है। ये भी पढ़े... निर्भया के चारों दोषियों को एक साथ दी गई फांसी, 7 साल बाद देश की बेटी को मिला इंसाफ पीढ़ियों से लोगों को फांसी दे रहा है यह जल्लाद परिवार, भगत सिंह-कसाब को भी फंदे पर लटका चुका है 7 साल बाद भी झकझोर कर रख देता है निर्भया कांड, जानें उस काली रात की पूरी कहानी निर्भया केस: दोषी विनय ने कहा-हमें फांसी देने से यदि बलात्कार रुक जाएं तो लटका दो Read the full article
निर्भया के चारों दोषियों को एक साथ दी गई फांसी, 7 साल बाद देश की बेटी को मिला इंसाफ
चैतन्य भारत न्यूज नई दिल्ली. आखिरकार वो दिन आ ही गया जिसका देशभर को इंतजार था। 16 दिसंबर 2012 में हुए निर्भया सामूहिक दुष्कर्म मामले के चार दोषी अक्षय, पवन, विनय और मुकेश को फांसी दे दी गई है। दिल्ली के तिहाड़ जेल में चारों दरिंदों को फांसी की सजा दी गई। अब इनके शवों को पोस्टमार्टम के लिए ले जाया जाएगा। आइए जानते हैं निर्भया के साथ हुई दरिंदगी की पूरी घटना के बारे में... (adsbygoogle = window.adsbygoogle || ).push({}); 16 दिसंबर 2012 की खौफनाक रात दिल्ली के चेहरे पर एक बदनुमा दाग की तरह ठहरी हुई ये वारदात आज भी उतनी ही दिल दहला देने वाली है जितनी 7 साल पहले थी। उस रात एक चलती बस में पांच बालिग और एक नाबालिग ने जिस तरह से निर्भया के साथ हैवानियत का खेल खेला वे बेहद ही शर्मनाक था। उस दिन पैरामेडिकल की छात्रा निर्भया अपने एक दोस्त के साथ साकेत स्थित सेलेक्ट सिटी मॉल में 'लाइफ ऑफ पाई' मूवी देखने गई थी। जिसके बाद घर के लिए उन्होंने ऑटो लिया। निर्भया के दोस्त के मुताबिक, हमने पहले घर के लिए डायरेक्ट ऑटो से जाने का फैसला किया था, लेकिन ऑटो वाले माने नहीं। उन्होंने कहा इतनी दूर तक सवारी नहीं बैठाते, हमारे घर जाने का समय होता है। जिसके बाद हमने ऑटो से कहा कि आप मुनिरका तक छोड़ देना। क्योंकि रात काफी हो चुकी थी। ऐसे में हमने फैसला किया कि मुनिरका से घर के लिए दूसरा साधन देख लेंगे। दोनों मुनिरका के बस स्टैंड उतरे। उस समय रात के करीब 8:30 बज रहे थे। दोस्त ने बताया कि जब मैं और निर्भया बस स्टैंड पर उतरे थे तो एक सफेद रंग की बस पहले से वहां खड़ी थी। जिसमें एक लड़का बार-बार कह रहा था चलो कहां जाना है। निर्भया को दीदी कहने पर हम दोनों उस बस में बैठ गए। जब बस थोड़ी देर आगे चली जब मुझे शक था कि कुछ सही नहीं चल रहा है। उन्होंने मुझसे किराया मांगा तो मैंने 20 रुपये दे दिए थे। दोस्त ने बताया जैसे ही बस थोड़ी और आगे चली तो दोषियों ने बस का गेट बंद कर दिया और 3 लोग सीट पर आए और मेरे चेहरे पर घूंसा मारा। जैसे ही मैं गिरा, दोषी मेरे ऊपर से निर्भया को खींच कर पीछे ले गए। जहां उसके साथ रेप किया। इसी दौरान दो से तीन लोग मुझे लगातार मार रहे थे। वहीं पिछली सीट में निर्भया के साथ दोषी इंसानियत की हद पार कर रहे थे। उन सबने निर्भया के साथ सामूहिक बलात्कार किया। यही नहीं उनमें से एक ने जंग लगी लोहे की रॉड निर्भया के प्राइवेट पार्ट में डाल दी। इस हैवानियत की वजह से निर्भया की आंतें शरीर से बाहर निकल आईं। बाद में उन शैतानों ने निर्भया और उसके दोस्त को दक्षिण दिल्ली के महिपालपुर के नजदीक वसंत विहार इलाके में चलती बस से फेंक दिया था। 29 दिसंबर, 2012 इन सबके बीच जो जुझ रही थी वो थी निर्भया। दिल्ली के सफदरजंग अस्पताल में इलाज चल रहा था, लेकिन हालत में सुधार न होने पर उसे सिंगापुर भेजा गया। वहां अस्पताल में इलाज के दौरान वह जिंदगी की जंग हार गई। रात के करीब सवा 10 बजे निर्भया ने दम तोड़ दिया। एक आरोपी ने कर ली आत्महत्या बता दें 18 दिसंबर 2012 को घटना के दो दिन बाद दिल्ली पुलिस ने छह में से चार आरोपियों राम सिंह, मुकेश, विनय शर्मा और पवन गुप्ता को गिरफ्तार किया। वहीं 21 दिसंबर 2012- दिल्ली पुलिस ने पांचवां आरोपी जो नबालिग था उसे दिल्ली से और छठे आरोपी अक्षय ठाकुर को बिहार से गिरफ्तार किया था। इनमें से मुख्य आरोपी राम सिंह ने तिहाड़ जेल में आत्महत्या कर ली, जबकि एक आरोपी को स्कूली प्रमाणपत्र के आधार पर नाबालिग मानते हुए तीन साल किशोर सुधार गृह में रहने की सजा दी गई। वो अब रिहा हो चुका है। बचे चार दोषियों को विशेष तौर पर गठित त्वरित कोर्ट ने 12 सितंबर 2013 को फांसी की सजा सुनाई गई थी। ये भी पढ़े... 7 साल बाद भी झकझोर कर रख देता है निर्भया कांड, जानें उस काली रात की पूरी कहानी 16 दिसंबर 2012, जब पार हुई थी इंसानियत की सारी हद, निर्भया की मां ने कहा- जब घर में बेटी का शव आया तो पीढ़ियों से लोगों को फांसी दे रहा है यह जल्लाद परिवार, भगत सिंह-कसाब को भी फंदे पर लटका चुका है, अब निर्भया के दोषियों की बारी Read the full article