आज तक ऐसा कोई जवाब नहीं मिला जिससे पता चले हम सोते क्यों हैं।
इंसान अपने जीवन का एक तिहाई हिस्सा, यानि लगभग 25 वर्ष, सोने में गुजार देता हैं।
जब तक बच्चा 2 साल का होता हैं तब तक बच्चे के मां-बाप उसकी वजह से 1055 घंटे कम सोते हैं।
सोते वक्त अगर आप के दिमाग को लगता है की आप किसी खतरे में नही हैं तो वे उन आवाजो को छानकर निकाल देता है जो आप को नींद से जगा सकती हैं।
जब आपकी नींद Alarm बजने से थोड़ी देर पहले खुल जाती हैं तो उसे “Circadian Rhythm” कहते हैं।
कभी-कभी जब हम सोने की कोशिश कर रहे होते हैं, तो घडी की टिक-टिक से भी हमें बहुत गुस्सा आता हैं।
अक्सर हम दोपहर के 2.00 बजे और रात के 2.00 बजे सबसे ज्यादा थकान महसूस करते हैं।














