कबूतर से फैल रही ये खतरनाक बीमारी, अब तक 200 से ज्यादा लोग हुए शिकार, आप भी रहें सावधान
चैतन्य भारत न्यूज नई दिल्ली. कबूतर आ, आ, आ कहकर हम उन्हें दाने डालकर अपने पास बुलाते हैं, लेकिन जब यही कबूतर कोई बीमारी का कारण बन जाए तो क्या आप उन्हें बुलाएंगे? देशभर में कई ऐसे लोग हैं जो कबूतरों से पैदा होने वाली खतरनाक बीमारियों से बेपरवाह हैं। पिछले कुछ दिनों में कबूतरों पर शोध हुए हैं, जिनमें उनसे बड़े खतरे सामने आए हैं। (adsbygoogle = window.adsbygoogle || ).push({}); समय रहते नहीं चलता बीमारी का पता डॉक्टरों के मुताबिक, कबूतर की बीट में ऐसे इंफेक्शन होते हैं जो आपके फेफड़ों को नुकसान पहुंचा सकते हैं और आपको समय रहते इनका पता भी नहीं चलता है। इसके अलावा यदि घर में लगे एसी के आसपास कबूतरों ने घोंसला बनाया है तो इससे भी खतरा कई गुना ज्यादा बढ़ जाता है। विशेषज्ञों के मुताबिक, कबूतर उन्हीं जगहों पर बैठना पसंद करते हैं, जहां पर इन्होंने बीट की हो। इसलिए जहां भी कबूतर होते हैं वहां से ज्यादा दुर्गन्ध आती है। जब बीट सूख जाती है तो पाउडर बन जाती है। फिर जब कबूतर अपने पंख फड़फड़ाते हैं तो बीट का पाउडर सांसों के जरिए हमारे शरीर के भीतर पहुंच जाता है। इससे फेफड़ों को नुकसान होता है। कबूतर की बीट के कारण होती हैं बीमारियां कबूतरों पर शोध में खुलासा हुआ है कि इनकी बीट की वजह से कई बीमारियां पैदा हो सकती हैं। प्रोफेसर वी वासुदेव राव की रिसर्च के मुताबिक, एक कबूतर सालभर में करीब 11.5 किलो बीट करता है। जब यह बीट सूख जाती है तो उसमें परजीवी पनपने लगते हैं। फिर ये परजीवी हवा में घुलकर संक्रमण फैलाते हैं, जिसके कारण कई तरह की बीमारियां होती हैं। कबूतर और उनकी बीट के आसपास रहने पर इंसानों में सांस लेने में तकलीफ, फेफड़ों में इंफेक्शन, शरीर में एलर्जी हो सकती है। कबूतर से होने वाली बीमारियां फेफड़ों से जुड़ी सर गंगाराम अस्पताल की एक डॉक्टर के मुताबिक, 'कबूतर से होने वाली बीमारियां फेफड़ों से जुड़ी हो सकती हैं, जिसको हम हाइपर सेंसिटिविटी न्यूमोनाइटिस कहते हैं। इसमें फेफड़ों का एलर्जिक रिएक्शन होता है। इसके अलावा कबूतर की बीट से फंगल बीमारियां भी हो सकती हैं, जिसको दवाओं के जरिए ठीक किया जा सकता है। यदि यह बीमारियां वक्त रहते पकड़ में न आएं तो किसी मरीज के लिए जानलेवा साबित हो सकती हैं।' शुरुआत में बीमारी के लक्षण हल्के होते हैं जानकारी के मुताबिक, इन बीमारियों को हिस्टोप्लाजमिस, क्रिप्टोकोकोसिस, सिटाकोसिस, साल्मोनेला और लिस्टिरिया के नाम से भी जाना जाता है। डॉक्टर दीपक तलवार ने बताया कि, इन बीमारियों के लक्षण शुरुआत में बड़े हल्के होते हैं, जैसे- खांसी आना, सूखी खांसी आना, और थोड़ा सांस का फूलना, धीरे धीरे शरीर का वजन कम होना, हल्का हल्का बुखार-सा लगना, शरीर में दर्द आदि। इसकी जांच के लिए ब्लड टेस्ट करते हैं, जिससे पता लगता है कि आपको कबूतर से होने वाली कोई बीमारी हुई है या नहीं। 200 मरीजों का रिकॉर्ड दिल्ली में रहने वाले एक शख्स ने बताया कि, कबूतरों ने उनकी पत्नी की जान ले ली। उनकी पत्नी की बीमारी की शुरुआत सिर्फ पेट दर्द से हुई। फिर उनकी पत्नी ऐसी बीमारी की गिरफ्तर में आ गई, जो कबूतरों की वजह से होती है। जिसका कोई इलाज नहीं है। दिल्ली के डॉक्टर दीपक तलवार के मुताबिक, 'ऑन द रिकॉर्ड अभी हमारे पास हाइपर सेंस्टिविटी के दो सौ मरीज हैं। ये 200 लोग, कबूतरों की बीट और उनके पंखों की वजह से बीमार हुए हैं।' 2001 में कबूतरों को दाना डालने पर प्रतिबंध लगा था बता दें साल 2001 में दुनियाभर के कई देशों में कबूतरों की गंदगी के खिलाफ जंग छिड़ गई थी। लंदन के ट्राफलगर स्क्वायर में उस साल कबूतरों को दाना डालने पर भी प्रतिबंध लगा दिया गया था। इतना ही नहीं बल्कि साल 2008 में तो सेंट मार्क स्क्वायर पर पक्षियों का खाना बेचने वाले लोगों पर जुर्माना लगने लगा था। साथ ही कुछ साल पहले कैटेलोनिया में कबूतरों को ओविस्टॉप नामक गर्भनिरोधक दवा खिलानी शुरू कर दी गई थी। ये भी पढ़े... टाइट जींस पहनकर लगातार 8 घंटे गाड़ी चलाने से खतरे में पड़ी युवक की जान, हुई यह जानलेवा बीमारी विशेषज्ञों ने भी माना भारतीय मसाले के गुण, बोले- एलर्जी से लेकर कैंसर जैसी बीमारी तक से बचाते हैं विश्व डायबिटीज दिवस : जानें कितनी खतरनाक बीमारी है डायबिटीज, बेहद खास है इस बार की थीम Read the full article










