"अप्रैजल के नाम पर दिया गया एक छोटा लोलिपॉप: एक साल की मेहनत की सच्चाई"
हर सुबह अलार्म से पहले उठना, भीड़ में सफर करना, डेडलाइन के नीचे सांस लेना, और फिर भी मुस्कुरा कर 'Good Morning' बोलना — ये हमारी नौकरी नहीं, हमारी निबंधित निष्ठा थी।
एक साल तक हर टास्क पूरा किया, छुट्टियों की कुर्बानी दी, कभी खुद को नहीं, कंपनी को प्राथमिकता दी। लगा था कि साल के अंत में कुछ तो बदलेगा — शायद सैलरी, शायद सम्मान।
पर जब appraisal आया, तो मीठे शब्दों की चमचमाती परत में लपेटा गया एक छोटा सा लोलिपॉप — ना स्वाद में इज़ाफा, ना ज़िंदगी में।
बोला गया — "आपकी मेहनत को देखा गया है, लेकिन इस बार बजट थोड़ा टाइट था। Next time better."
Next time? हम तो हर दिन best देते हैं, फिर हर बार hope ही क्यों मिलती है?
कभी-कभी लगता है कि हम काम नहीं कर रहे, बस अपने सपनों का barter system चला रहे हैं — बदले में मिलती है एक मीठी मुस्कान, और एक invisible थपकी: "Good job, keep it up!"
पर अब शायद कहना पड़े — "Appraisal ke naam par lollipop doge, toh ek din hum मीठा खाना छोड़ देंगे।"













