I was working on a sundrenched dreamy feel for another project and thought I would practice on the Lorax’s forest
seen from Thailand
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I was working on a sundrenched dreamy feel for another project and thought I would practice on the Lorax’s forest
M3M Foundation is a charitable trust in gurgaon which undertakes various activities like sapling plantation, re-plantation drives, waste disposal management and rejuvenation of water bodies
विश्व पर्यावरण संरक्षण दिवस : प्रदूषण कम कर रहा आपकी सांसें, हो जाइए सावधान, अपनी प्रकृति को बचाएं
चैतन्य भारत न्यूज प्रकृति के बिना हमारा कोई अस्तित्व नहीं है। हवा, पानी, भोजन, धूप सब कुछ हमें प्रकृति से ही मिलता है। यदि प्रकृति की सेहत बिगड़ने लगी तो हम सभी की जान भी खतरे में पड़ सकती है। पर्यावरण संतुलन को बनाए रखने एवं लोगो को जागरूक करने के लिए हर वर्ष 26 नवंबर को 'विश्व पर्यावरण संरक्षण दिवस' मनाया जाता है। (adsbygoogle = window.adsbygoogle || ).push({}); पर्यावरण के बिना असंभव है जीवन पिछले तीन दशकों से यह महसूस किया जा रहा है कि वैश्विक स्तर पर सबसे बड़ी समस्या पर्यावरण से ही जुड़ी हुई है। प्रकृति ने मनुष्य को कई प्रकार की सौगात दी है जिसमें सबसे बड़ी सौगात पर्यावरण की है। यदि पर्यावरण न होता तो जीवन संभव ही नहीं होता। इसके बिना कोई भी जीव-जंतु जिंदा नहीं रह पाता। जंगल पृथ्वी के फेफड़े कहे जाते हैं। जंगल से ही हमें सबसे ज्यादा शुद्ध वायु और सकारात्मक ऊर्जा मिलती है। प्रदूषण पर्यावरण का सबसे बड़ा दुश्मन पूरा विश्व आज पर्यावरण को लेकर चिंतित है। बता दें पर्यावरण वायु, जल, मिट्टी, मानव और वृक्षों से मिलकर बना है। इनमें से किसी भी एक के असंतुलित होने पर पर्यावरण प्रक्रिया असहज हो जाती है जिसका सीधा असर मानव जीवन पर पड़ता है। साथ ही इन दिनों प्रदूषण भी पर्यावरण का सबसे बड़ा दुश्मन बना हुआ है। प्रदूषण मानव जीवन के साथ ही पेड़, पौधे और जलवायु को भी प्रभावित करता है। देखा जाए तो विश्व ने जैसे-जैसे विकास और प्रगति हासिल की है वैसे-वैसे पर्यावरण असंतुलित होता गया है। बड़ी-बड़ी फैक्ट्रियों का निर्माण होना, कल-कारखाने, फैक्ट्रियों से निकलते धुंए, वाहनों से निकलने वाले धुएं, वृक्षों की अंधाधुंध कटाई, नदी और तालाबों का प्रदूषित होना, बड़ी-बड़ी इमारतें बनना आदि के जरिए कहीं न कहीं पर्यावरण के साथ खिलवाड़ हो रहा है। प्रदूषण के कारण सांस लेना भी दूभर हुआ इन दिनों प्रदूषण ने विकराल रूप धारण कर लिया है। खासकर अगर भारत की ही बात की जाए तो महानगरों में वायु प्रदूषण अधिक फैला है। चैबीसों घंटे कल-कारखानों और वाहनों से निकलने वाला विषैला धुआं इस तरह वातावरण में फैल गया है कि सांस लेना तक दूभर हो गया है। इसके कारण लोगों में अनेकों बीमारियां फैलती जा रही हैं। एक ताजा सर्वे के आंकड़ों पर नजर डालें तो पिछले 4 सालों में चार करोड़ से भी ज्यादा लोग तेज सांस के संक्रमण के शिकार हो रहे हैं। इस अवधि में 12 हजार 200 लोग वायु प्रदूषण से जूझते हुए मृत्यु को प्राप्त हुए। एक अनुमान के मुताबिक, हर साल भारत में प्रदूषण के कारण ही 150 लोगों की जान चली जाती है और हजारों लोग फेफड़े और हृदय की बीमारियों के शिकार हो जाते हैं। पेड़ों की अंधाधुन कटाई के कारण भी पर्यावरण को बहुत नुकसान होता है। रिपोर्ट्स के मुताबिक, हर साल विश्व में एक करोड़ हैक्टेयर से अधिक और भारत में 10 लाख हैक्टेयर वन काटे जा रहे हैं। ऐसे में वन्यजीव भी धीरे-धीरे लुप्त होते जा रहा है। आने वाली पीढ़ी के लिए अंधकारमय हो सकता है जीवन मानव जीवन के लिए पर्यावरण का अनुकूल और संतुलित होना बेहद महत्वपूर्ण है। यदि हमने आज, अभी और इसी वक्त से पर्यावरण संरक्षण पर ध्यान नहीं दिया तो आने वाली पीढ़ी के लिए जीवन अंधकारमय हो सकता है। पर्यावरण को सदैव स्वस्थ रखने के लिए हर व्यक्ति को अपने आस-पास अधिक से अधिक संख्या में पेड़ लगाना चाहिए, पर्यावरण को स्वच्छ और सुंदर रखना चाहिए, तब जाकर हमारे सुखमय जीवन को भी संरक्षित रखा जा सकता है। Read the full article
विश्व पर्यावरण संरक्षण दिवस : प्रदूषण कम कर रहा आपकी सांसें, हो जाइए सावधान, अपनी प्रकृति को बचाएं
चैतन्य भारत न्यूज प्रकृति के बिना हमारा कोई अस्तित्व नहीं है। हवा, पानी, भोजन, धूप सब कुछ हमें प्रकृति से ही मिलता है। यदि प्रकृति की सेहत बिगड़ने लगी तो हम सभी की जान भी खतरे में पड़ सकती है। पर्यावरण संतुलन को बनाए रखने एवं लोगो को जागरूक करने के लिए हर वर्ष 26 नवंबर को 'विश्व पर्यावरण संरक्षण दिवस' मनाया जाता है। (adsbygoogle = window.adsbygoogle || ).push({}); पर्यावरण के बिना असंभव है जीवन पिछले तीन दशकों से यह महसूस किया जा रहा है कि वैश्विक स्तर पर सबसे बड़ी समस्या पर्यावरण से ही जुड़ी हुई है। प्रकृति ने मनुष्य को कई प्रकार की सौगात दी है जिसमें सबसे बड़ी सौगात पर्यावरण की है। यदि पर्यावरण न होता तो जीवन संभव ही नहीं होता। इसके बिना कोई भी जीव-जंतु जिंदा नहीं रह पाता। जंगल पृथ्वी के फेफड़े कहे जाते हैं। जंगल से ही हमें सबसे ज्यादा शुद्ध वायु और सकारात्मक ऊर्जा मिलती है। प्रदूषण पर्यावरण का सबसे बड़ा दुश्मन पूरा विश्व आज पर्यावरण को लेकर चिंतित है। बता दें पर्यावरण वायु, जल, मिट्टी, मानव और वृक्षों से मिलकर बना है। इनमें से किसी भी एक के असंतुलित होने पर पर्यावरण प्रक्रिया असहज हो जाती है जिसका सीधा असर मानव जीवन पर पड़ता है। साथ ही इन दिनों प्रदूषण भी पर्यावरण का सबसे बड़ा दुश्मन बना हुआ है। प्रदूषण मानव जीवन के साथ ही पेड़, पौधे और जलवायु को भी प्रभावित करता है। देखा जाए तो विश्व ने जैसे-जैसे विकास और प्रगति हासिल की है वैसे-वैसे पर्यावरण असंतुलित होता गया है। बड़ी-बड़ी फैक्ट्रियों का निर्माण होना, कल-कारखाने, फैक्ट्रियों से निकलते धुंए, वाहनों से निकलने वाले धुएं, वृक्षों की अंधाधुंध कटाई, नदी और तालाबों का प्रदूषित होना, बड़ी-बड़ी इमारतें बनना आदि के जरिए कहीं न कहीं पर्यावरण के साथ खिलवाड़ हो रहा है। प्रदूषण के कारण सांस लेना भी दूभर हुआ इन दिनों प्रदूषण ने विकराल रूप धारण कर लिया है। खासकर अगर भारत की ही बात की जाए तो महानगरों में वायु प्रदूषण अधिक फैला है। चैबीसों घंटे कल-कारखानों और वाहनों से निकलने वाला विषैला धुआं इस तरह वातावरण में फैल गया है कि सांस लेना तक दूभर हो गया है। इसके कारण लोगों में अनेकों बीमारियां फैलती जा रही हैं। एक ताजा सर्वे के आंकड़ों पर नजर डालें तो पिछले 4 सालों में चार करोड़ से भी ज्यादा लोग तेज सांस के संक्रमण के शिकार हो रहे हैं। इस अवधि में 12 हजार 200 लोग वायु प्रदूषण से जूझते हुए मृत्यु को प्राप्त हुए। एक अनुमान के मुताबिक, हर साल भारत में प्रदूषण के कारण ही 150 लोगों की जान चली जाती है और हजारों लोग फेफड़े और हृदय की बीमारियों के शिकार हो जाते हैं। पेड़ों की अंधाधुन कटाई के कारण भी पर्यावरण को बहुत नुकसान होता है। रिपोर्ट्स के मुताबिक, हर साल विश्व में एक करोड़ हैक्टेयर से अधिक और भारत में 10 लाख हैक्टेयर वन काटे जा रहे हैं। ऐसे में वन्यजीव भी धीरे-धीरे लुप्त होते जा रहा है। आने वाली पीढ़ी के लिए अंधकारमय हो सकता है जीवन मानव जीवन के लिए पर्यावरण का अनुकूल और संतुलित होना बेहद महत्वपूर्ण है। यदि हमने आज, अभी और इसी वक्त से पर्यावरण संरक्षण पर ध्यान नहीं दिया तो आने वाली पीढ़ी के लिए जीवन अंधकारमय हो सकता है। पर्यावरण को सदैव स्वस्थ रखने के लिए हर व्यक्ति को अपने आस-पास अधिक से अधिक संख्या में पेड़ लगाना चाहिए, पर्यावरण को स्वच्छ और सुंदर रखना चाहिए, तब जाकर हमारे सुखमय जीवन को भी संरक्षित रखा जा सकता है। Read the full article
Individual choices can control Air Pollution! Take Eco-friendly decisions today & let your coming generation breathe freely!
Good quality air plays a vital role in determining your health as well as your mental & physical development…Read More…http://bit.do/eKrGx
We all should celebrate nature conservation day in order to raise awareness about protecting nature and conserving our natural resources. Environmental conservation is very well taught to the Children at Snehalaya so that they understand their responsibility towards nature and safeguard it in the future. #Worlnatureconservationday #Nature #EnvironmentConservation #snehalaya
These organisations promote eco-friendly and biodegradable products to do their best in minimising the use of plastics and thereby conserving the environment
From bamboo straws to edible cutlery, here are some of the ways you can do your bit to eliminate plastic and help the planet, thanks to these Indian startups
#worldbookfair is on at #pragatimaidan #newdelhi . Organised by #nationalbooktrustindia & #itpo (Indian Trade Promotion Organization), the event is supported by #ministryofhumanresource and development, #governmentofindia . #mediapartners are #allindiaradio @delhimetro_official and @doordarshan_india . Started on January 06, 2018, the fair is on until January 14 during 11am-8pm IST. #europeanunion is the #guestofhonor . #climatechange and #environmentconservation is the theme. #uae , #egypt , #iran , #nepal , #spain , #sweden , #france🇫🇷 , #germany are some key international participants with #book in their respective languages. India of course spanned through several halls with books from every possible niche. Oldies are mostly available for around ₹150 each, which we did not find too tempting a deal. However, we could hit upon a couple of good bargain stores like 3 for ₹100; buy 2 get 1 free, but 1 get 2 free type. Fresh #originalbooks are available from #internationalpublishers but quite steep in pricing. #diamondcomics was conspicuously absent. However, original Calvin & Hobbes, Asterisk, Garfield, etc. fascinated the adults who grew up reading these. A couple of halls are dedicated to books in #indianlanguages Including #hindi . For kids until standard 5, lot of learning tools & books are also available. Students can dig into a huge collection on offer. We were looking for stationery but could not find any stall. Cash is the universal payment mode. Paytm is also accepted at most shops. Card facility is limited. Overall, good fair if you are mad about books and have decent dispensable cash. Take kids along.