डायबिटीज ये ऐसा रोग है जो डायबिटीज मेलिटस ये सामान्य है इसमें बहुत ज्यादा सुगर रक्त में संचारित होता है | हमारे शरीर भोजन को ग्लूकोस में तोड़ कर ऊर्जा के लिए प्रयोग करता है | जो भी व्यक्ति स्वस्थ होता है उसका इन्सुलिन सहायता करता उसके ग्लूकोज़ लेवल को रेगुलेट करता | है और लेवल को मैटेन रखता है | इन्सुलिन एक हॉर्मोन जो उत्पन्य पैंक्रियास दवरा होता है |जिसको भी डायबिटीज होता है उसकी बॉडी पर्याप्त इन्सुलिन उत्पन्य नहीं कर पाती है जिससे उसके बॉडी में ग्लूकोज़ का लेवल हाई हो जाता है|
१- टाइप -१ -इस प्रकार के मरीज को इन्सुलिन डिपेंडेंट डायबिटीज मेलिटस के नाम से जाना जाता है(IDDM ) | ऐसे मरीज की बॉडी में इन्सुलिन या तो बनते नहीं है या तो बहुत कम बनते है | और ऐसे लोगों जीवन जीने के लिए इन्सुलिन के इंजेक्शन लेने पड़ते है | ऐसे लोग अधिकतर बचपन से ही पीड़ित होते है | ये ज़्यदातर ४० साल के कम उम्र के लोगों देखा जाता है |२- 2-टाइप -२ – इस प्रकार के मरीज को नॉन इन्सुलिन डिपेंडेंट डायबिटीज मेलिटस (NIDDM )| ऐसे मरीजों के बॉडी में इन्सुलिन या तो नार्मल या हाई लेवल बनते है |लेकिन कभी -कभी इनका खपत नहीं हो पता है | और इसका कारण अस्वस्थ दिनचर्या , मोटापा है इसका शुरुआत वयस्क होने पे भी होता है | ३- टाइप -३ -प्रेगनेंसी -induced डायबिटीज .-प्रेगनेंसी के दौरान सुगर लेवल बढ़ जाता है |लेकिन प्रेगनेंसी के बाद सामान्यत ये खत्म हो जाता है |









