सिद्धू का “खेल के मैदान की सीख” से लेकर “सियासत की सीट” तक का सफर
नवजोत सिंह सिद्धू का जन्म भारत में पंजाब के पटियाला में 20 अक्टूबर 1963 में हुआ। 1983 से 1999 तक 17 साल सिद्धू भारतीय क्रिकेट टीम में बतौर बल्लेबाज़ खेले । इसके बाद उन्होंने खेल के मैदान से सियासी मैदान में छलांग लगाई और 2004 में भारतीय जनता पार्टी के टिकट पर अमृतसर लोकसभा निर्वाचन क्षेत्र से लोकसभा चुनाव जीता। लेकिन सासंद बनते ही उन्हें राजनीति क्षेत्र में सियासत के खेल ने घेर लिया और उनसे जुड़ा 1988 का एक गैर इरादतन हत्या का मामला फिर से खुल गया। 2006 में कोर्ट केस के चलते उन्हें तीन साल की कैद की सजा सुनाई गई। 2007 में लोकसभा सांसद पद से इस्तीफा देकर सिद्धू ने सुप्रीम कोर्ट में मामले की फिर से सुनवाई की गुहार लगाई नतीज़न उनकी सजा पर रोक लग गयी। और इसी साल यानि की 2007 में वे एक बार फिर अमृतसर लोकसभा सीट से चुनाव लड़े और जीत हासिल की। 2009 में भी लोकसभा चुनाव में सिद्धू ने जीत हासिल की। लेकिन 2014 में भाजपा ने सिद्धू को अमृतसर सीट से चुनाव के लिए नहीं चुना और उनकी जगह अरुण जेटली को खड़ा किया लेकिन जेटली ये चुनाव हार गए ।बाद में भाजपा ने 2016 में उन्हें राज्यसभा भेजा लेकिन पंजाब विधानसभा चुनाव में पार्टी की नजरअंदाजी उन्हें पसंद नहीं आई और उन्होंने बीजेपी और राज्यसभा की सदस्यता से इस्तीफा दे दिया। और भाजपा छोड़ने के बाद उन्होंने अपनी पार्टी आवाज-ए-पंजाब लॉन्च की। इसी दौरान काफी चर्चा रही कि सिद्धू आम आदमी पार्टी में शामिल हो सकते हैं। लेकिन ये सभी दावे तब गलत साबित हो गए जब 2017 में सिद्धू ने कांग्रेस पार्टी जॉइन की और इसी साल के पंजाब विधानसभा चुनाव में उन्होंने जीत हासिल की । सियासत के मैदान में सिद्धू को अब तक जीत ही हांसिल हुई है, इसी बात को ध्यान रखते हुए कांग्रेस ने नवजोत सिंह सिद्धू को कांग्रेस के पंजाब प्रदेश अध्यक्ष के रूप में चुना है ताकि पार्टी “पंजाब कांग्रेस संकट” से उबरा जा सके।


















