घडी और समय-
घडी को बोलते लोग समझ जाते है की समय की बात कर रहे है | लेकिन हमे पता होना चाहिए जब इस दुनिया में रह रहे है तो हमे यहाँ बैठे ही दुनिया के किसी कोनो का टाइम पता चल जाता है क्या ये उतना सरल होगा जब लोगों के पास घडी न होगी या समय देखने का यंत्र न होगा |समय पर तो पूरा पृत्वी ही टिकी है |कब कौन जन्मा और कब कौन मरा इसका भी क्या हमे ज्ञान था |समय जितना महत्वपूर्ण है उतना ही घडी की भी महत्ता होगी | इसलिए मेरे मन में विचार आया की क्यों न आज उस समय को घडी के साथ देखते है जिस घडी में हम समय देखते थे उसमे उसका भी इतिहास देखते है |की पहली घडी कब बनी और इसके पीछे का इतिहास क्या था और जब घडिया नहीं थी तो लोग टाइम का कैसे अंदाज़ा लगाते थे | और आज के दौर में घडिया कितनी बदल गयी है |














