अगर स्त्री का अपमान ना किया होता, तो लंकेश आज भी नरेश होता, कुरुक्षेत्र का मैदान लहु से लथ ना होता... स्त्री हर नए युग के परारम्भ का स्तम्भ है... सिर्फ़ एक शिशु को जन्म नहीं देती, एक इतिहास का प्रारम्भ और अंत है, स्त्री अनंत है.... भरी सभा में किया था द्रौपदी का अपमान, महाभारत उसी का है परिणाम, ना किया होता सीता का अपमान, तो लंका ही होती आज सबसे विशाल... पर हर बार स्त्री का अपमान करके ही क्यूँ , मर्दों को मर्यादा का आभास कराया जाता है... और कितने सबक़ चाहता है यह संसार, क्यूँ कोख की क़ीमत को हर बार समझाया जाता है, प्रश्नों का है मेरे मन में अंबार... हर बार एक स्त्री की रक्षा के लिए, भगवान को बुलाया जाता है, तब कहाँ जाता है व्यक्तिगत अभिमान... क्यूँ हर बार अग्नि परीक्षा सीता से ही मंगी, क्यूँ नहीं माँगा उत्तर राम से भी एक बार, किसी क कहने पर सीता वन में गयी, क्यूँ नहीं बोला की सीता नहीं देगी परीक्षा इस बार, ग़लती रावण की थी सीता की नहीं थी कोई भी स्वेच्छा ... क्यूँ धर्म आया आड़े, और निश्स्त्र हुए पांडव सारे, यह कैसा धर्म था उनका, दिया परिचय कायरता का, नहीं करके अपनी अर्धांगनी की रक्षा ... कुछ प्रश्नों की वजह से है निशब्द सारे , क्यूँकि यह जानते है कि इस में हम सब ख़ुद ही हारे ... ख़ुद ही हारे... कुछ प्रश्न....... गौरांशी शर्मा #poetry #peace #positivity #powerful #innerocean #inrefarraige https://www.instagram.com/p/CDaitIGMTr2/?igshid=nmecqpu1mktb