दिल्ली हिंसा: घर से दूध लेने निकला था 15 साल का किशोर सिर में लगी गोली
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दिल्ली हिंसा: घर से दूध लेने निकला था 15 साल का किशोर सिर में लगी गोली
15 साल के इत्मीनान की अंतिम यात्रा में उमड़ी भीड़. (Photo-(Rounak Kumar Gunjan/News18.com)
परिवार की करीबी रज़िया ने कहा- वह हमारे सामने बड़ा हुआ था. ये यहां मौजूद हम सब लोगों के लिए ऐसा है मानो हमने अपने परिवार के किसी सदस्य को खो दिया है. ये बच्चा बिना किसी गलती के मारा गया.
Last Updated:
February 28, 2020, 7:54 PM IST
उत्तर-पूर्वी दिल्ली के ब्रह्मपुरी इलाके में 15 साल के इत्मिनान अहमद* (बदला हुआ नाम) के घर जाने वाली सारी सड़कें गुरुवार को बंद थीं. शाम साढ़े चार बजे भारी सुरक्षा इंतजाम के बीच इकट्ठा हुए जो उसे दफनाने से पहले पास की मस्जिद ले गए. अहमद को मंगलवार को सिर में गोली मार दी गई थी. वह शाम को अपने घर से दूध लेने के लिए निकला था. वह कहां है इस बारे में उसके परिवार को कुछ पता नहीं था तभी उनके पास एक पहचान के शख्स का फोन आया.
इत्मिनान के चाचा ने कहा “हमें बिल्कुल मालूम भी नहीं चला कि कब हमारा बच्चा उस इलाके में चला गया जहां हिंसा भड़की हुई थी. हमें करीब साढ़े पांच बजे एक फोन आया. फोन करने वाले ने बताया कि आपका बच्चा अस्पताल में है. हम जल्दी से अनवर हॉस्पिटल पहुंचे जहां हमें मालूम हुआ कि उसके सिर में गोली लगी और उसकी खोपड़ी से बाहर निकल गई.”
रात के दो बजे उसे मृत घोषित कर दिया गया.आखिरी विदाई देने के लिए लगा था मजमा
इत्मिनान के घर पर उसके पड़ोसियों और इलाके के बाकी लोगों की भीड़ लगी हुई थी जो उसके अंतिम यात्रा में शामिल होने और उसे आखिरी विदाई देने के लिए पहुंचे थे. इलाके की कई महिलाएं उसे आखिरी बार देखना चाहती थीं.
परिवार की करीबी रज़िया ने कहा- वह हमारे सामने बड़ा हुआ था. ये यहां मौजूद हम सब लोगों के लिए ऐसा है मानो हमने अपने परिवार के किसी सदस्य को खो दिया है. ये बच्चा बिना किसी गलती के मारा गया.लोग उनके घर के बाहर अंतिम संस्कार के लिए तय समय से घंटा भर पहले ही पहुंच गए. स्थानीय लोगों को सूचित किया गया था कि पुलिस इस क्षेत्र को बंद कर देगी. वे बंद से बचने के लिए अपने घरों से कुछ देर पहले ही निकल गए थे, यहां तक कि कुछ तो करीब एक किलोमीटर आगे निकल गए थे.
डॉक्टर बनना चाहता था इत्मिनान
अंतिम यात्रा में इत्मिनान के दोस्त भी मौजूद थे. नौवीं में पढ़ने वाला इत्मिनान पंडित मदन मोहन लाल स्कूल में पढ़ता था. उसके एक दोस्त ने कहा हम दोपहर में साथ में क्रिकेट खेलने जाया करते थे. उस दिन स्कूल नहीं जाना था. हम अपने घरों में ही थे. हम पिछले शुक्रवार से नहीं मिले थे.
15 साल का इत्मिनान डॉक्टर बनना चाहता था. वह कुछ दिनों में इससे जुड़ी कोचिंग क्लासेस ज्वाइन करना चाहता था.
मस्जिद पर नमाज और अंतिम संस्कार के लिए रुकने के बाद, अंतिम यात्रा कब्रिस्तान की ओर बढ़ी. परिवार और इलाके के पुरुषों के अलावा कई पुलिस अधिकारी भी मौजूद थे.
(मृतक के नाबालिग होने के चलते उसका नाम बदला गया है)
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First published: February 28, 2020, 7:54 PM IST
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