छठे भाव में राहु और बारहवें भाव में केतु दोनों को शुभ माना जाता है, लेकिन उनकी शुभता संबंधित भावों में विराजमान ग्रहों पर भी निर्भर करती है।
ज्योतिष में राहु-केतु को छाया ग्रह के तौर पर देखा जाता है और इन्हे क्रूर, पापी व अलगाववादी ग्रह माना जाता है. इन दोनों ग्रहों का कोई भी भौतिक स्वरूप नहीं है. राहु को वृषभ और मिथुन राशि में उच्च माना जाता है तो केतु की उच्च राशि वृश्चिक व धनु मानी गई है. राहु की प्रकृति शनि के समान और केतु की प्रकृति मंगल के समान मानी गई है। राहु व केतु सदैव वक्री गति से चलते हैं और यह दोनों ग्रह मिलकर मनुष्य के जीवन पर विशेष प्रभाव डालते हैं.














