6 वर्ष बाद अब खुल सकते हैं गांधीसागर बांध के सभी गेट
विशेष : देश में दूसरे सबसे बडे़ बांध का जलस्तर 1309.07 फीट तक पहुंचा,भराव क्षमता-1312 फीट, हाड़ौती में अलर्ट जारी। 23 अगस्त,2013 को खोले गये थे सभी गेट। न्यूजवेव @ कोटा राजस्थान व मध्यप्रदेश दोनों राज्यों में सिंचाई व किसानों की खुशहाली के पर्याय ऐतिहासिक गांधी सागर बांध का जलस्तर वर्षाें बाद 1309.07 फीट से अधिक हो चुका है तथा इन दिनों तेज वर्षा होने से पानी की आवक निरंतर जारी है। मध्यप्रदेश के मंदसौर जिले में चंबल नदी पर 65 वर्ष पूर्व 7 मार्च, 1954 में बने सबसे बडे़ विशाल बांध की भराव क्षमता 1312 फीट है। देश में हीराकुंड बांध के बाद यह दूसरा सबसे बडा बांध है।
सिंचाई विभाग के सूत्रों ने बताया कि दोनों राज्यों में इस मानसून में अतिवृष्टि होने से प्रमुख चार बांध लबालब भर गये हैं। सुरक्षा के कारणों से इस डेम के गेट खोलकर पानी छोडा जायेगा। जिससे चंबल नदी के निचले क्षेत्रों में बने तीन बांधों राणा प्रताप सागर डेम, जवाहर सागर डेम एवं कोटा बैराज के गेट खोलकर पानी की निकासी की जाएगी। जिससे डाउन स्ट्रीम में स्थित आवासीय बस्तियों में पानी घुस सकता है। प्रशासन ने गांधी सागर के गेट खुलने पर लोगों को अलर्ट रहने तथा पर्याप्त सावधानी बरतने की अपील की है। उल्लेखनीय है कि 23 अगस्त,2013 में तीसरी बार गांधी सागर डेम के सभी गेट खोले गये थे। यह बांध 204 फीट (62.17 मीटर) उंचा है। इससे दोनों राज्यों में 22,584 वर्गकिमी कैचमेंट एरिया में सिंचाई की जाती है। इस बांध पर 115 मेगावाट का पन बिजलीघर (हाइडल पावर प्लांट) भी चालू है। चंबल नदी के चारों बांध हुये लबालब चंबल घाटी परियोजना के तहत चंबल नदी पर 1954 में गांधी सागर बांध का निर्माण होने के बाद 1970 में रावतभाटा में राणाप्रताप सागर बांध तथा 1972 में जवाहर सागर डेम बांध तथा 1960 में 104 किमी की दूरी पर कोटा शहर में कोटा बैराज की स्थापना की गई थी।
Kota barrage कोटा बैराज की 2342 किमी लंबी दोनों मुख्य नहरों से दोनों राज्यों में 4.24 लाख हैक्टेयर भूमि में सिंचाई की जाती है। खास बात यह है कि इस बार चारों बांध लबालब भरे हुये हैं, जिससे किसानों के चेहरे खिल उठे हैं। Read the full article

















