देश की महिला किसान और किसानों की विधवाओं पर सब तरफ सन्नाटा है. आज किसान मुक्ति संसद का पहला चरण इन्हीं के नाम किया गया. मेधा पाटकर जी इस चरण का सञ्चालन कर रही हैं. यह सच है कि देश के किसानों में 70% महिलाएं हैं, लेकिन उनकी स्थिति भयावह है. उस पर जब उनके पति या बेटे क़र्ज़ या फसल बर्बादी पर आत्महत्या कर लेते हैं, तो घरबार की ज़िम्मेदारी निभाने की मजबूरी उन्हें घेर लेती है. ऐसी माताओं बहनों ने अपनी आपबीती आज दिल्ली के संसद मार्ग पर सुनायी. देश की संसद में विराजमान हमारे नेता इसी मार्ग से हो लोकतंत्र के सबसे बड़े मंदिर में ऐसी ही माताओं-बहनों की रक्षा करने की शपथ लेते हैं. लेकिन क्या वास्तव में ऐसा हो रहा है? #KisanMuktiSansad #Indebted2Farmers #mahilasansad (at जंतर मंतर, दिल्ली)










