VIDEO: महफ़िल-ए-मुशायरा- ‘कहां तक ज़ेब देता है तमाशाई बने रहना मियां , अब वक़्त है ख़ुद को तमाशा कर लिया जाए’ ताबिश मेहदी अपने अशआर को जिन अल्फ़ाज़ में पिरोते हैं उनके मायने गज़ब की गहराई रखते हैं.
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VIDEO: महफ़िल-ए-मुशायरा- ‘कहां तक ज़ेब देता है तमाशाई बने रहना मियां , अब वक़्त है ख़ुद को तमाशा कर लिया जाए’ ताबिश मेहदी अपने अशआर को जिन अल्फ़ाज़ में पिरोते हैं उनके मायने गज़ब की गहराई रखते हैं.
VIDEO: महफ़िल-ए-मुशायरा- 'बस्तियां बस्ती गईं जंगल फ़ना होते गए, लोग पास आते गए लेकिन जुदा होते गए'
VIDEO: महफ़िल-ए-मुशायरा- ‘बस्तियां बस्ती गईं जंगल फ़ना होते गए, लोग पास आते गए लेकिन जुदा होते गए’
[ad_1] आज की महफ़िल-ए-मुशायरा में पेश हैं प्रोफेसर शहपुर रसूल के क़लाम. [ad_2] Source link
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VIDEO: महफ़िल-ए-मुशायरा- ‘रोज़ मिलता है मुझे रोज़ बताता हूं उसे, नाम हम जैसों का तो याद नहीं हो सकता’ अजय पांडे अपने अशआर को जिन अल्फ़ाज़ में पिरोते हैं उनके मायने गज़ब की गहराई रखते हैं.
हिंदी न्यूज़ - VIDEO: महफ़िल-ए-मुशायरा- 'काम सहाफ़ी सच्चाई से जो लें तो, हर चैनल अख़बार बदल कर रखे देंगे'/waseem rashid mushayra
हिंदी न्यूज़ – VIDEO: महफ़िल-ए-मुशायरा- ‘काम सहाफ़ी सच्चाई से जो लें तो, हर चैनल अख़बार बदल कर रखे देंगे’/waseem rashid mushayra
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News18Hindi
Updated: February 5, 2018, 3:21 PM IST Hindi.news18.com ने कॉलम शुरू किया है. इसमें आप हर रोज़ कविताएं, शायरी, गज़लें और नज़्म सुनने का लुत्फ़ उठाते हैं. आज की महफ़िल-ए-मुशायरा में सुनिए और पढ़िए डॉ. वसीम राशिद के क़लाम.
सुनिए और पढ़िए डॉ. वसीम राशिद के क़लाम.
मसनद पर जो बैठे हैं ये कौन इन्हें समझायेगा आने वाला एक-एक…
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हिंदी न्यूज़ - urdu mushayra waseem nadir shayri/VIDEO: महफ़िल-ए-मुशायरा- 'जितने सख़ी थे शहर में कंगाल हो गए, चादर के जैसे लोग भी रूमाल हो गए'
हिंदी न्यूज़ – urdu mushayra waseem nadir shayri/VIDEO: महफ़िल-ए-मुशायरा- ‘जितने सख़ी थे शहर में कंगाल हो गए, चादर के जैसे लोग भी रूमाल हो गए’
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Updated: March 28, 2018, 4:29 PM IST वसीम नादिर की शायरी के मायने जितने गहरे होते हैं, उनके अल्फ़ाज़ उतने ही सुलझे हुए होतें. वे अपने गहरे मायनों में पिरोओ अल्फ़ाज को जिस तरह बोलते हैं, उसमें जिंदगी के सबसे महीन जज़्बातों पिरो देते हैं. हर लफ़्ज के साथ सबक़ और सीख देते हैं.
आज की महफ़िल-ए-मुशायरा में पेश हैं वसीम नादिर…
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हिंदी न्यूज़ - jauhar kanpuri shayri urdu mushayra/ VIDEO: महफ़िल-ए-मुशायरा- 'हवेली छोड़कर कच्चे मकां में रहना पड़ता है, फ़क़त चरख़ा चलाने से कोई गांधी नहीं होता'
हिंदी न्यूज़ – jauhar kanpuri shayri urdu mushayra/ VIDEO: महफ़िल-ए-मुशायरा- ‘हवेली छोड़कर कच्चे मकां में रहना पड़ता है, फ़क़त चरख़ा चलाने से कोई गांधी नहीं होता’
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News18Hindi
Updated: April 3, 2018, 5:10 PM IST जौहर कानपुरी अपने अशआर को जिन अल्फ़ाज़ में पिरोते हैं उनके मायने गज़ब की गहराई रखते हैं. पेश-ए-नज़र उनके जो अशआर हैं, उसमें जौहर ने इरादे जवां रखने वालो में बाज़ी पलटने की कूवत की बात की है.
आज की महफ़िल-ए-मुशायरा में पेश हैं जौहर कानपुरी के क़लाम.
हद में दोज़ख़ की हमसे जन्नती नहीं…
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हिंदी न्यूज़ - urdu mushayra lata haya shayri/ VIDEO: महफ़िल-ए-मुशायरा- 'वो मज़हब ख़ूं बहाने की इजाज़त दे नहीं सकता, वज़ू के वास्ते जो पानी भी कम कम बहाता है'
हिंदी न्यूज़ – urdu mushayra lata haya shayri/ VIDEO: महफ़िल-ए-मुशायरा- ‘वो मज़हब ख़ूं बहाने की इजाज़त दे नहीं सकता, वज़ू के वास्ते जो पानी भी कम कम बहाता है’
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Updated: April 7, 2018, 7:26 PM IST लता हया अपने अशआर को जिन अल्फ़ाज़ में पिरोती हैं उनके मायने गज़ब की गहराई रखते हैं. पेश-ए-नज़र उनके जो अशआर हैं, उसमें लता ने ज़िक्र किया है कि यहां न कोई हिन्दू है, न मुस्लिम, सिख ईसाई यही वो मंच है जिसपर हिन्दुस्तान मिलता है.
आज की महफ़िल-ए-मुशायरा में पेश हैं लता हया के क़लाम.
अदब…
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हिंदी न्यूज़ - urdu shayri tabish mehdi mushayra
हिंदी न्यूज़ – urdu shayri tabish mehdi mushayra
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News18Hindi
Updated: May 3, 2018, 4:13 PM IST ताबिश मेहदी अपने अशआर को जिन अल्फ़ाज़ में पिरोते हैं उनके मायने गज़ब की गहराई रखते हैं. पेश-ए-नज़र उनके जो अशआर हैं, उसमें ताबिश ने ज़िक्र किया है- मुहब्बत करने वाले छल-कपट से दूर होते हैं, मुहब्बत करने वालों पर भरोसा कर लिया जाए.
आज की महफ़िल-ए-मुशायरा में पेश हैं ताबिश मेहदी के क़लाम
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