A Tribute To ' #Nargis' ji On Her Birth Anniversary ! By #sudhakarshahane आज की हिंदी फिल्मों में बहुत कम सही लेकिन, एक दौर ऐसा भी रहा है कि, जब हर हिंदी फ़िल्म में कम से कम एक ग़मज़दा नगमा ज़रूर हुआ करता था ... दर्द भरे गीतों का एक अलग ही मुक़ाम हुआ करता था ... ऐसे गीतों के साथ लोग अपना ग़म बांट लिया करते थे ... और ऐसे नगमे बहुत जल्द लोकप्रिय होते थे ... 'SJ' फ़िल्म बरसात से फ़िल्म संगीत में जो नई ताज़गी लेकर आए थे, वही ताज़गी उनके ग़मज़दा गीतों में भी बराबर दिखाई दी ...१९५१ में राज कपूर और नरगिस की फ़िल्म 'आवारा' में हसरत जयपुरी साहब का लिखा, SJ का संगीतबद्ध किया, और लता मंगेशकर का गाया, "आ जाओ तड़पते हैं अरमान अब रात गुज़रनेवाली है" ...बहुत बहुत लोकप्रिय हुआ था ... अपने साथी के इंतज़ार की पीड़ा का खूब एहसास कराया था, हसरत साहब ने इस गीत के लफ़्जों में ...इस गीत का असर कुछ इस क़दर हुआ कि राज कपूर की अगली ही फ़िल्म 'आह' में भी उन्होने हसरत साहब से ऐसा ही एक गीत लिखवाया .... १९५३ की फ़िल्म 'आह' में राज कपूर जी के साथ नरगिस जी की जोड़ी एक बार फिर नज़र आयीं ....इस फ़िल्म के गीत भी 'आवारा' की तरह गली गली गूंजे, और आज भी कहीं ना कहीं से अक्सर सुनाई देते हैं ... प्रस्तुत गीत 'SJ' के फ़िल्मी गीतों के ख़जाने का एक मोती है, और आज ६९ साल बाद भी इस मोती की वही चमक बरक़रार है ... इस युगल गीत की ख़ासीयत यह है कि, 'SJ' ने बहुत कम साज़ों का इस्तेमाल किया है, मुख्य रूप से मटके का सुंदर प्रयोग किया है। लताजी के आलाप इस गीत को और भी ज़्यादा असरदार बना देते हैं .... मुकेश जी तो दर्द भरे गीत गाने में उस्ताद थे और राज साहब की आवाज़ भी थे, जुदाई के दर्द को बयां करते हसरत साहब के बोलों के तो क्या कहने, और ... 'SJ' की रूह की गहराई से बनाई हुई तर्ज़ बेमिसाल है ... ! आजा रे, अब मेरा दिल पुकारा, रो रो के ग़म भी हारा बदनाम न हो प्यार मेरा मौत मेरी तरफ आने लगी, जान तेरी तरफ जाने लगी बोल शाम-ए-जुदाई क्या करे, आस मिलने की तड़पाने लगी घबराये हाय रे दिल, सपनों में आ के कभी मिल अपने बिमार-ए-गम को देख ले, हो सके तो तू गम को देख ले तूने देखा न होगा ये समा, कैसे जाता है दम को देख ले #birthanniversary #tributes #nargisdutt #nargis https://youtu.be/sver9O8K3t8 https://www.instagram.com/p/CeRUPHCPU17/?igshid=NGJjMDIxMWI=
















