शौचालय : आप समझ रहे हैं मामला कितना गंभीर है! राष्ट्रद्रोह से भी ज़्यादा !
शौचालय : आप समझ रहे हैं मामला कितना गंभीर है! राष्ट्रद्रोह से भी ज़्यादा !
अभिषेक श्रीवास्तव
बेहद कंज़र्वेटिव अनुमान लगाएं तो इस देश का नागरिक अगर रोजाना पांच मिनट निपटता हो, तो कायदे से वह पांच शौचालयों के बनने में लगने वाला वक़्त और लागत बर्बाद कर रहा होगा। व्यावहारिक अनुमान के मुताबिक देखें तो एक नागरिक रोजाना कोई बीस शौचालयों की लागत और निर्माण अवधि को बर्बाद करता है। एक शौचालय बनवाने के लिए 12000 के सरकारी ग्रांट के मुताबिक एक नागरिक रोजाना दो लाख चालीस हजार का…
View On WordPress














