The bench considered the request made by the Indian Union Muslim League through their Senior Counsel Kapil Sibal, to list the matters challenging the validity of CAA for an urgent hearing.
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VIDEO : सबरीमाला तीर्थयात्रा पर निकला यह बेजुबान जानवर, तय की 480 किलोमीटर की यात्रा
चैतन्य भारत न्यूज सबरीमाला. केरल में सबरीमाला स्थित भगवान अयप्पा के मंदिर में दर्शन के लिए रविवार को श्रद्धालुओं की भारी भीड़ उमड़ पड़ी। दो महीने तक चलने वाली वार्षिक तीर्थयात्रा ‘मंडल-मकरविलक्कू’ का आज दूसरा दिन है। ऐसे ही 13 श्रद्धालुओं की एक टोली आंध्र प्रदेश के तिरुमला से केरल के सबरीमाला मंदिर की यात्रा पर नंगे पैर पैदल निकली है। यह यात्रा करीब 550 किलोमीटर की होगी। सोमवार तक इन्होंने 480 किलोमीटर की यात्रा पूरी कर ली है। खास बात यह है कि, इस टोली के साथ एक कुत्ता भी तीर्थयात्रा कर रहा है। (adsbygoogle = window.adsbygoogle || ).push({}); जी हां... यह कुत्ता अपने आप ही इस टोली के साथ चल रहा है। इस टोली के सदस्यों में से कोई भी यात्री इसका मालिक नहीं है। इसका एक वीडियो भी सोशल मीडिया पर जमकर वायरल हो रहा है। इस टोली का नेतृत्व कर रहे राजेश गुरुस्वामी कहना है कि, 'कुत्ते ने चिकमंगलुरु के कोट्टिगेहरा गांव से पीछे आना शुरू किया। अब तक ये पीछे आते-आते 480 किलोमीटर तक दूर आ गया है और आंध्र प्रदेश के तिरुपति पहुंच गया।' #WATCH Karnataka: A stray dog has been following a group of 13 Ayyappa devotees, who are on a pilgrimage to Kerala's Sabarimala & has walked 480 km so far. The devotees started from Andhra Pradesh's Tirumala on Oct 31 & have reached Chikkamagaluru dist's Kottigehara now. (17.11) pic.twitter.com/9ke8uFwRCt — ANI (@ANI) November 18, 2019 उन्होंने कहा कि, 'हमनें 31 अक्टूबर को तिरुमला से तीर्थयात्रा शुरू की। हम लगातार चलते रहे। हमने पहले इस बात पर ध्यान नहीं दिया कि हमारे साथ यह कुत्ता भी चल रहा है। हमकों लगा कि कुछ दूर चलने के बाद वह चला जाएगा। लेकिन उसने अपनी यात्रा जारी रखी है। अब हमारे साथ-साथ उस कुत्ते ने भी 480 किलोमीटर की यात्रा पूरी कर ली है।' टोली के सदस्य भी इस कुत्ते को अपना साथी मानने लगे हैं। यात्रा के दौरान वो कुत्ते को खाना और पानी भी दे देते हैं। ये भी पढ़े... कौन हैं भगवान अयप्पा और क्यों इस मंदिर में महिलाओं को नहीं मिलता प्रवेश? जानिए सबरीमाला मंदिर का इतिहास बड़ी बेंच को सौंपा गया सबरीमाला मंदिर मामला, महिलाओं के प्रवेश से जुड़ा है विवाद Read the full article
कौन हैं भगवान अयप्पा और क्यों इस मंदिर में महिलाओं को नहीं मिलता प्रवेश? जानिए सबरीमाला मंदिर का इतिहास
चैतन्य भारत न्यूज भारत में ऐसे कई मंदिर हैं जो अपने आप में बेहद खास है। इन्हीं में से एक है सबरीमाला का मंदिर। यहां हर दिन लाखों लोग दर्शन करने के लिए आते हैं। इस मंदिर को मक्का-मदीना की तरह विश्व के सबसे बड़े तीर्थ स्थानों में से एक माना जाता है। पिछले काफी समय से सबरीमाला मंदिर में महिलाओं के प्रवेश को लेकर विवाद चल रहा है। सुप्रीम कोर्ट इजाजत मिलने के बावजूद मंदिर में महिलाओं के प्रवेश पर रोक है। गुरुवार को सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले को बड़ी बेंच को सौंप दिया गया है। यानी अब इस मामले में 7 जजों की बेंच सुनवाई करेगी। आइए जानते हैं इस मंदिर का इतिहास और इससे जुड़ी कुछ खास बातें। (adsbygoogle = window.adsbygoogle || ).push({});
सबरीमाला मंदिर सबरीमाला मंदिर केरल में पथनमथिट्टाजिले के पश्चिमी घाटी पर संरक्षित वनक्षेत्र में स्थित है। यह मंदिर 18 पहाड़ियों से घिरे समुद्र तल से 1,574 फीट की उंचाई पर स्थित है। इस मंदिर को मक्का-मदीना की तरह विश्व के सबसे बड़े तीर्थ स्थानों में से एक माना जाता है। यहां विराजते हैं भगवान अयप्पा। अयप्पा का एक नाम 'हरिहरपुत्र' है। हरि यानी विष्णु और हर यानी शिव के पुत्र। हरि के मोहनी रूप को ही अयप्पा की मां माना जाता है। अयप्पा स्वामी मंदिर करोड़ों हिंदुओं की आस्था का प्रतीक है।
सबरीमाला का नाम शबरी के नाम पर है, जिनका जिक्र रामायण में है। इस मंदिर में महिलाओं का आना वर्जित है। इसके पीछे मान्यता ये है कि यहां जिस भगवान की पूजा होती है (श्री अयप्पा), वे ब्रह्माचारी थे इसलिए यहां 10 से 50 साल तक की लड़कियां और महिलाएं नहीं प्रवेश कर सकतीं। मंदिर में ऐसी छोटी बच्चियां आ सकती हैं, जिनको मासिक धर्म शुरू ना हुआ हो या ऐसी या बूढ़ी औरतें, जो मासिक धर्म से मुक्त हो चुकी हों। कौन थे अयप्पा ? अयप्पा के बारे में कहा जाता है कि उनके माता-पिता ने उनकी गर्दन के चारों ओर एक घंटी बांधकर उन्हें छोड़ दिया था। पंडालम के राजा राजशेखर ने अयप्पा को पुत्र के रूप में पाला। लेकिन भगवान अयप्पा को ये सब अच्छा नहीं लगा और उन्हें वैराग्य प्राप्त हुआ तो वे महल छोड़कर चले गए।
सबरीमाला मंदिर की मान्यताएं कहा जाता है कि इस मंदिर के पास मकर संक्रांति की रात घने अंधेरे में एक ज्योति दिखती है। बताया जाता है कि जब-जब ये रोशनी दिखती है इसके साथ शोर भी सुनाई देता है। भक्त मानते हैं कि ये देव ज्योति है और भगवान इसे खुद जलाते हैं। इसे मकर ज्योति का नाम दिया गया है। इस ज्योति के दर्शन के लिए यहां दुनियाभर से करोड़ों श्रद्धालु हर साल आते हैं। मान्यता है कि यहां दर्शन करने वाले भक्तों को दो महीने पहले से ही मांस-मछली का सेवन त्यागना होता है। कहा जाता है कि अगर भक्त तुलसी या फिर रुद्राक्ष की माला पहनकर और व्रत रखकर यहां पहुंचकर दर्शन करे तो उसकी सभी मनोकामना पूर्ण होती है। यहां आने वाले श्रद्धालु सिर पर पोटली रखकर पहुंचते हैं। वह पोटली नैवेद्य (भगवान को चढ़ाई जानी वाली चीजें, जिन्हें प्रसाद के तौर पर पुजारी घर ले जाने को देते हैं) से भरी होती है। कैसे शुरू हुआ विवाद साल 2006 में मंदिर के मुख्य ज्योतिषी परप्पनगडी उन्नीकृष्णन ने कहा था कि मंदिर में स्थापित अयप्पा अपनी ताकत खो रहे हैं और वह इसलिए नाराज हैं क्योंकि मंदिर में किसी युवा महिला ने प्रवेश किया है। फिर कन्नड़ अभिनेता प्रभाकर की पत्नी जयमाला ने यह दावा किया था कि, 'उन्होंने अयप्पा की मूर्ति को छुआ और उनकी वजह से अयप्पा नाराज हुए। वह प्रायश्चित करना चाहती हैं।' उन्होंने बताया था कि, साल 1987 में जब वह अपने पति के साथ मंदिर में दर्शन करने गई थीं तो भीड़ की वजह से धक्का लगने के कारण वह गर्भगृह पहुंच गईं और भगवान अयप्पा के चरणों में गिर गईं। उनके इसी दावे पर केरल में हंगामा होने के बाद मंदिर में महिलाओं का प्रवेश वर्जित होने के इस मुद्दे पर लोगों का ध्यान गया। फिर 2006 में राज्य के यंग लॉयर्स असोसिएशन ने सुप्रीम कोर्ट में इसके खिलाफ याचिका दायर की। लेकिन फिर भी 10 सालों तक यह मामला लटका रहा। 7 नवंबर 2017 को सुप्रीम कोर्ट ने अपना रुख जाहिर किया था कि वह सबरीमाला मंदिर में हर उम्र की महिलाओं को प्रवेश देने के पक्ष में हैं। 'भूमाता ब्रिगेड' की संस्थापक और सामाजिक कार्यकर्ता तृप्ति देसाई ने भी सबरीमाला मंदिर आने की बात कही थी। तृप्ति ने आगे आकर महिलाओं का नेतृत्व करते हुए मंदिर में प्रवेश करने का प्रयास किया, हालांकि वह इसमें सफल नहीं हो पाईं। 28 सितंबर, 2018 को सुप्रीम कोर्ट ने ऐतिहासिक फैसला सुनाते हुए केरल के सबरीमाला मंदिर में महिलाओं को प्रवेश की अनुमति दे दी। कोर्ट ने साफ कहा है कि हर उम्र वर्ग की महिलाएं अब मंदिर में प्रवेश कर सकेंगी। बावजूद इसके महिलाओं को मंदिर में प्रवेश नहीं दिया जा रहा था। यह भी पढ़े... बड़ी बेंच को सौंपा गया सबरीमाला मंदिर मामला, महिलाओं के प्रवेश से जुड़ा है विवाद Read the full article
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