शाम होती है तो..पलकों पे सजाता है मुझे..
वो चरागों की तरह, रोज़ जलाता है मुझे….॥
में हूँ ये कम तो नहीं है , तेरे होने की दलील …
मेरा होना तेरा एहसास दिलाता है मुझे…॥
वो मुझे मिल ना सका इसकी..शिकायत कैसी…
ये भी एहसास है की वो याद तो आता है मुझे॥
- समीर राहत














