दसवीं सदी में स्थापित हुए चंद्रेसल मठ का जीर्णोद्धार करने के नाम पर पुरातत्व विभाग ने विलक्षण भारतीय निर्माण कला की नायाब निशानी को पूरी तरह तबाह कर दिया। पुरातत्व विभाग के अधिकारों ने ११०० साल पुरानी इंटरलॉकिंग कंस्ट्रक्शन साइट को ध्वस्त करने से पहले लाइन ड्राइंग, पत्थरों की नंबरिंग और फोटोग्राफिक एवीडेंस तक तैयार नहीं किए। जिसका खामियाजा यह हुआ कि अब सभामंडप का मूल स्वरूप ही खत्म हो गया। सीमेंट से हो रही चिनाई लापरवाही से सभामंडप को ध्वस्त करने के बाद भी पुरातत्व विभाग के अफसरों की अराजकता खत्म होने का नाम नहीं ले रही। खामियों का खुलासा होने के बाद भी पुरातत्व विभाग के अधिकारी गलतियां सुधारने के बजाय दसवीं सदी के मंदिर का ऐतिहासिक महत्व मिटाने पर अमादा हो गए हैं। उपमहापौर सुनीता व्यास जी के साथ पगमार्क फाउंडेशन के सदस्य शनिवार को जीर्णोद्धार कार्य का निरीक्षण करने चंद्रेसल मठ पहुंचे। उन्होंने मंदिर के ११०० साल पुराने स्वरूप को बिगाडऩे पर खासी नाराजगी जताई और ऐतिहासिक धरोहर का जीर्णोद्धार साधारण मकानों की तरह कराए जाने पर पुरातत्व विभाग के अफसरों को जमकर लताड़ा। #PagmarkFoundation #ChandresalMath #SaveChandresal #SaveOurHistory #ArchaeologicalDepartmentOfIndia @pmoindia @vasundhararajeofficial @kota_smart_citizen (at Chandresal)













