मैं शायद हूँ यकीन तुम हो मेरे चेहरे पे ठहरी इक हंसी तुम हो
तेरा मिलना यूँ रोजाना लगे साँसों की आदत तुमको दोहराना
तू ही मेरा कल है तू ही मेरा आज
हवायें तुझसे जो गुजरी हैं मुझे वो सांसें बनके मिली हैं
ज़िन्दगी की तरह ठहरी है देखो ना तुम
कभी अलफ़ाज़ बनके मेरे ज़रा होंठों पे यूँ रह लेना
मैं बोलूं और सुनाई देना हमेशा तुम











