मौन का अनुभव
मैं मौन को सुन पा रहा हूँ
बाज़ार की चहल-पहल और शोर
के नीचे दबा हुआ मौन
अपारदर्शी होते कोहरे के
नीचे दबा हुआ मौन
मेरे पांव के नीचे दब कर मरी
चींटी का मौन
मेरे दिल की धड़कनों के बीच में
छिपा हुआ मौन
सामने से गुजरते
प्रेमी युगल के
बीच का मौन
पिता और पुत्र के
संवादों का मौन
तुम्हारा मौन
इस शहर का मौन
पर ये मौन
अब मुझे परेशान नहीं करता
अब मैं जान चुका हूँ
सतत मौन को
अब मैं जान चुका हूँ मृत्यु को














