Bollywood women of the 1950′s.

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Bollywood women of the 1950′s.
Devdas (1955) - Kisko Khabar Thi Kisko Yakeen Tha Lyrics Meaning (English Translation) | किसको खबर थी किसको यकीं था #sdburman #TalatMahmood #sahirludhianvi #DilipKumar #SuchitraSen #Devdas #songlyrics #HindiKala Song Lyrics: https://hindikala.com/devdas-1955-kisko-khabar-thi-kisko-yakeen-tha-lyrics/
Devdas (1955) - Mitwa Laagi Re Yeh Kaisi Anbujh Aag Lyrics Meaning (English Translation) | मितवा लागी रे ये कैसी अनबुझ आग #sdburman #TalatMahmood #sahirludhianvi #DilipKumar #SuchitraSen #Devdas #songlyrics #HindiKala Song Lyrics: https://hindikala.com/devdas-1955-mitwa-laagi-re-yeh-kaisi-anbujh-aag-lyrics/
Devdas (1955) - Sajan Ki Ho Gayi Gori Lyrics Meaning (English Translation) | साजन की हो गयी गोरी #sdburman #GeetaDutt #MannaDey #sahirludhianvi #SuchitraSen #Devdas #songlyrics #HindiKala Song Lyrics: https://hindikala.com/devdas-1955-song-sajan-ki-ho-gayi-gori-lyrics/
Mamta (1966) - Chupa Lo Yun Dil Mein Pyar Mera Lyrics Meaning (English Translation) | छुपा लो यूँ दिल में प्यार मेरा #HemantKumar #LataMangeshkar #Roshan #AshokKumar #SuchitraSen #classic #MajroohSultanpuri #songlyrics #HindiKala Lyrics with Meaning: https://hindikala.com/mamta-1966-chupa-lo-yun-dil-mein-pyar-mera-lyrics-meaning/
মহানায়ক আর মহানায়িকার অনুরাগে বাঙালি হৃদয় প্লাবিত চিরকাল। তাদের অনুরাগ বিরাগ আবার নতুন করে নবরাগ। আসুন সেই অমর নায়ক নায়িকার অতুলনীয় প্রেমের বা নবরাগের আমরা সরিক হয়ে উঠি। #uttamkumar #uttamkumarforever #nabarag #suchitrasen❤ #suchitrasen #uttamsuchitra #uttamsuchitratribute #uttamkumaroldbengalimovies #uttamkumar #uttamkumarsoldmovies #UttamKumar #bengalicinema #bengali #amazing #awesome #kolkatayoutubers #kolkatabuzz #kolkatagram #kolkata #kolkatadiary #kolkatainstagrammers #uttamkumarfans #uttamkumarfanclub #bengalilove #bong #bongs #bongrips #bongbeauties #ytfbong #ronnysreview2 @mahanayak_uttam @uttam.suchitra @mahanayak_uttam_kumar @suchitra.diva @bengalqueen.suchitrasen @suchitrasen @baruog @aamar_aami_uttam @mahanayaku (at Kolkata - City of Joy) https://www.instagram.com/p/CGe7IWtHHtx/?igshid=1jv4s45ldnfbg
जयंती विशेष: सौंदर्य और अभिनय की रानी सुचित्रा सेन, इस वजह से ठुकराया था दादासाहेब फाल्के पुरस्कार
चैतन्य भारत न्यूज सिने जगत में तीन दशक तक राज करने वाली अभिनेत्री सुचित्रा सेन की आज जयंती है। सुचित्रा का जन्म 6 अप्रैल, 1931 को पवना (अब बांग्लादेश) में हुआ था। उन्होंने 17 जनवरी, 2014 को दुनिया को अलविदा कह दिया था। सुचित्रा की खूबसूरती और अदाकारी का हर कोई कायल था। जन्मदिन के इस खास मौके पर जानते हैं सुचित्रा के जीवन से जुड़ी कुछ खास बातें।
सुचित्रा का असली नाम रोमा दासगुप्ता है लेकिन फिल्मी दुनिया में वे सुचित्रा के नाम से मशहूर हुईं। उनके पिता करुणोमय एक स्कूल में हेड मास्टर थे। सुचित्रा ने अपनी स्कूली पढ़ाई पवना से ही की। फिर वह इंग्लैंड चली गईं और समरविले कॉलेज, ऑक्सफोर्ड से उन्होंने अपना ग्रेजुएशन किया।
सुचित्रा ने अपने फिल्मी करियर की शुरुआत साल 1952 में आई फिल्म 'शेष कोथाय' से की थी। साल 1962 में सुचित्रा को फिल्म 'बिपाशा' में काम करने के लिए 1 लाख रुपए मिले थे, जो उस समय में बहुत बड़ी रकम थी। उन्ही की फिल्म के अभिनेता उत्तम कुमार को सिर्फ 80 हजार रुपए मिले थे।
साल 1963 में सुचित्रा सेन की एक और सुपरहिट फिल्म 'सात पाके बांधा' रिलीज हुई। इस फिल्म के लिए सुचित्रा को मास्को फिल्म फेस्टिवल में सर्वश्रेष्ठ फिल्म अभिनेत्री के पुरस्कार से सम्मानित किया गया। बता दें सुचित्रा पहली ऐसी भारतीय अभिनेत्री थीं जिन्हे अपनी खूबसूरत एक्टिंग के लिए अंतरराष्ट्रीय फिल्म फेस्टिवल में अवार्ड मिला था।
सुचित्रा सेन की धमाकेदार एंट्री बिमल रॉय की फिल्म 'देवदास' से हुई। साल 1955 में आई फिल्म 'देवदास' में सुचित्रा सेन ने पारो का किरदार निभाया था। वहीं सुचित्रा सेन 1975 में रिलीज हुई फिल्म 'आंधी' से अपनी एक अलग छाप छोड़ी। इस फिल्म में उन्होंने अभिनेता संजीव कुमार के साथ काम किया था। यह फिल्म कुछ दिनों के लिए बैन भी कर दी गई थी हालांकि, बाद में जब यह रिलीज हुई तो अच्छी सफलता मिली।
सुचित्रा ने बड़े से बड़े फिल्मकारों और अभिनेता के साथ भी काम करने का प्रस्ताव ठुकराया है। सुचित्रा ने राज कपूर की एक फिल्म में काम करने से सिर्फ इसलिए मना कर दिया था क्योंकि उन्हें राज कपूर द्वारा झुककर फूल देने का तरीका उन्हें पसंद नहीं आया था। वह एक बार सत्यजीत राय की फिल्म को भी मना कर चुकी है। साल 2005 में सुचित्रा ने दादासाहेब फाल्के पुरस्कार का प्रस्ताव सिर्फ इसलिए ठुकरा दिया था क्योंकि इसके लिए उन्हें कोलकाता छोड़कर दिल्ली जाना पड़ता।
साल 1978 के बाद सुचित्रा ने फिल्म इंडस्ट्री से संन्यास ले लिया। फिर वे रामकृष्ण मिशन की सदस्य बन गईं और सामाजिक कार्य करने लगीं। साल 1972 में सुचित्रा सेन को पद्मश्री पुरस्कार से नवाजा गया। अपने दमदार अभिनय से दर्शकों के बीच खास पहचान बनाने वालीं सुचित्रा सेन 17 जनवरी 2014 को इस दुनिया को अलविदा कह गयीं। ये भी पढ़े... जयंती विशेष: कामयाबी, प्यार और फिर मौत का सफर, तन्हाई और दर्द से भरी थी परवीन बॉबी की जिंदगी जन्मदिन विशेष : कभी एक रुपए में की थी राज कपूर की फिल्म, जानिए बेमिसाल एक्टर प्राण के बारे में खास बातें Read the full article
जयंती विशेष: सौंदर्य और अभिनय की रानी सुचित्रा सेन, इस वजह से ठुकराया था दादासाहेब फाल्के पुरस्कार
चैतन्य भारत न्यूज सिने जगत में तीन दशक तक राज करने वाली अभिनेत्री सुचित्रा सेन की आज जयंती है। सुचित्रा का जन्म 6 अप्रैल, 1931 को पवना (अब बांग्लादेश) में हुआ था। उन्होंने 17 जनवरी, 2014 को दुनिया को अलविदा कह दिया था। सुचित्रा की खूबसूरती और अदाकारी का हर कोई कायल था। जन्मदिन के इस खास मौके पर जानते हैं सुचित्रा के जीवन से जुड़ी कुछ खास बातें।
सुचित्रा का असली नाम रोमा दासगुप्ता है लेकिन फिल्मी दुनिया में वे सुचित्रा के नाम से मशहूर हुईं। उनके पिता करुणोमय एक स्कूल में हेड मास्टर थे। सुचित्रा ने अपनी स्कूली पढ़ाई पवना से ही की। फिर वह इंग्लैंड चली गईं और समरविले कॉलेज, ऑक्सफोर्ड से उन्होंने अपना ग्रेजुएशन किया।
सुचित्रा ने अपने फिल्मी करियर की शुरुआत साल 1952 में आई फिल्म 'शेष कोथाय' से की थी। साल 1962 में सुचित्रा को फिल्म 'बिपाशा' में काम करने के लिए 1 लाख रुपए मिले थे, जो उस समय में बहुत बड़ी रकम थी। उन्ही की फिल्म के अभिनेता उत्तम कुमार को सिर्फ 80 हजार रुपए मिले थे।
साल 1963 में सुचित्रा सेन की एक और सुपरहिट फिल्म 'सात पाके बांधा' रिलीज हुई। इस फिल्म के लिए सुचित्रा को मास्को फिल्म फेस्टिवल में सर्वश्रेष्ठ फिल्म अभिनेत्री के पुरस्कार से सम्मानित किया गया। बता दें सुचित्रा पहली ऐसी भारतीय अभिनेत्री थीं जिन्हे अपनी खूबसूरत एक्टिंग के लिए अंतरराष्ट्रीय फिल्म फेस्टिवल में अवार्ड मिला था।
सुचित्रा सेन की धमाकेदार एंट्री बिमल रॉय की फिल्म 'देवदास' से हुई। साल 1955 में आई फिल्म 'देवदास' में सुचित्रा सेन ने पारो का किरदार निभाया था। वहीं सुचित्रा सेन 1975 में रिलीज हुई फिल्म 'आंधी' से अपनी एक अलग छाप छोड़ी। इस फिल्म में उन्होंने अभिनेता संजीव कुमार के साथ काम किया था। यह फिल्म कुछ दिनों के लिए बैन भी कर दी गई थी हालांकि, बाद में जब यह रिलीज हुई तो अच्छी सफलता मिली।
सुचित्रा ने बड़े से बड़े फिल्मकारों और अभिनेता के साथ भी काम करने का प्रस्ताव ठुकराया है। सुचित्रा ने राज कपूर की एक फिल्म में काम करने से सिर्फ इसलिए मना कर दिया था क्योंकि उन्हें राज कपूर द्वारा झुककर फूल देने का तरीका उन्हें पसंद नहीं आया था। वह एक बार सत्यजीत राय की फिल्म को भी मना कर चुकी है। साल 2005 में सुचित्रा ने दादासाहेब फाल्के पुरस्कार का प्रस्ताव सिर्फ इसलिए ठुकरा दिया था क्योंकि इसके लिए उन्हें कोलकाता छोड़कर दिल्ली जाना पड़ता।
साल 1978 के बाद सुचित्रा ने फिल्म इंडस्ट्री से संन्यास ले लिया। फिर वे रामकृष्ण मिशन की सदस्य बन गईं और सामाजिक कार्य करने लगीं। साल 1972 में सुचित्रा सेन को पद्मश्री पुरस्कार से नवाजा गया। अपने दमदार अभिनय से दर्शकों के बीच खास पहचान बनाने वालीं सुचित्रा सेन 17 जनवरी 2014 को इस दुनिया को अलविदा कह गयीं। ये भी पढ़े... जयंती विशेष: कामयाबी, प्यार और फिर मौत का सफर, तन्हाई और दर्द से भरी थी परवीन बॉबी की जिंदगी जन्मदिन विशेष : कभी एक रुपए में की थी राज कपूर की फिल्म, जानिए बेमिसाल एक्टर प्राण के बारे में खास बातें Read the full article