स्वप्रदोष जिसे रात्रिकालीन उत्सर्जन के रूप में भी जाना जाता है। एक प्राकृतिक शारीरिक प्रक्रिया है जिसमें एक पुरुष नींद के दौरान अनैच्छिक स्खलन का अनुभव करता है। यह अक्सर किशोरावस्था के दौरान होता है लेकिन किसी भी उम्र में भी हो सकता है। स्वप्रदोष को यौन विकास का एक सामान्य हिस्सा माना जाता है और आमतौर पर यह किसी अंतर्निहित स्वास्थ्य समस्या का संकेत नहीं देता है। हालाँकि यदि बार -बार होता है और परेशानी का कारण बनता है।
पुरुष द्वारा नींद में वासनात्मक स्वप्न देखने कामुक चेष्टा मात्र से अनायास उसके वीर्य का निकल जाना ही स्वप्नदोष है। स्वप्नदोष का मूल कारण है गन्दे और कामोत्तेजक विचार। अत: इस रोग को निर्मूल करने के लिए ओषधियों से भी अधिक कामुक प्रवृत्ति पर संयम की परम आवश्यकता है। प्राचीन भारत में विवाह से पहले 25 साल तक के काल को ब्रह्मचर्य आश्रम का नाम देकर ब्रह्मचर्य पालन को विशेष महत्व दिया था और विवाह के बाद गृहस्थाश्रम में भी संतान की आवश्यकता न होने पर बिना किसी कारण वीर्यनाश को अनुचित ठहराया गया था। आज के बदलते परिवेश में भी मन की चचंलता और कामुक प्रवृत्ति पर नियंत्रण अत्यावश्यक है। इसे भी पढ़े :















