विराली मोदी बना रहीं अशक्तों की जिंदगी आसान, जानिए उनकी दिलचस्प कहानी
चैतन्य भारत न्यूज
गणतंत्र दिवस के खास मौके पर आज हम आपको बताने जा रहे हैं एक ऐसी महिला की कहानी जिसने अपनी अंतरात्मा की आवाज सुनी और निकल पड़ी दूसरों के जीवन में बदलाव लाने के लिए।
(adsbygoogle = window.adsbygoogle || ).push({});
15 साल की उम्र में किसी अज्ञात संक्रमण के कारण गर्दन से नीचे के भागों के लकवे का शिकार हुईं विराली मोदी को रेल यात्राओं के दौरान हुए अनुभव रेलवे स्टेशनों को अक्षम लोगों के अनुकूल बनवाने के सामाजिक आंदोलन की राह पर ले आए। इतना ही नहीं बल्कि विराली की एक पहल से देश भर के कम से कम आठ रेलवे स्टेशनों ने यह लक्ष्य हासिल किया है जिससे लाखों यात्रियों को आसानी हुई है।
मुंबई में पैदा हुई और अमेरिका में पली-बढ़ी विराली साल 2010 में इलाज कराने भारत आईं क्योंकि यहां यह सुविधा अमेरिका के मुकाबले काफी सस्ती थी। विराली के मुताबिक, जब वह मुंबई रेलवे स्टेशन पर पहुंची तो उन्हें लग रहा था कि अमेरिकी रेलवे स्टेशनों की ही तरह से यहां भी शारीरिक बाधाओं से पीड़ित लोगों के लिए रैंप होगा, लेकिन ऐसा कुछ न पाकर उन्हें भारी निराशा हुईं।
वे बताती हैं कि 'इसके बाद मेरी मां ने दो कुली लिए कि मुझे व्हीलचेयर के साथ ट्रेन में पहुंचा कर बर्थ पर बिठाया जा सके। कुलियों ने मेरी स्थिति का नाजायज फायदा उठाया और मेरे शरीर को गलत तरीके से छुआ और अपनी विवशता पर मैं रो पड़ी।' ऐसा एक बार नहीं बल्कि रेल यात्राओं के दौरान उन्हें तीन से चार बार ऐसी ही स्थिति का सामना करना पड़ा।
इसके बाद विराली ने अपने अनुभवों को ब्लॉग में लिखना शुरू किया। उनके ब्लॉग को बहुत सफलता मिली और लाखों लोगों ने उनके ब्लॉग पढ़ना और फॉलो करना शुरू कर दिया। साल 2015 में उन्होंने ऑनलाइन याचिका के माध्यम से रेलवे से सभी स्टेशनों पर अक्षम लोगों के लिए रैंप बनाने का आग्रह किया। उन्होंने रेल मंत्रालय की वेबसाइट पर इस बारे में शिकायत भी डाली, जहां से जवाब मिला कि उनकी शिकायत विदेश मंत्रालय को भेज दी गई है। विराली का कहना है कि, 'उन्होंने ऐसा शायद इसलिए किया हो कि मैं अनिवासी भारतीय हूं।' जब बात नहीं सुनी गई तो विराली ने सोशल मीडिया पर हैशटैग #MyTarinToo अभियान शुरू किया।
आखिरकार कई महीनों बाद, इस समस्या को समझने वाले केरल के एक रेलवे अधिकारी ने उनके अभियान पर प्रतिक्रिया जताई। उन्होंने तिरुचिरापल्ली और तिरुवनंतपुरम समेत केरल के छह रेलवे स्टेशनों पर रैंप बनवा दिए। वहीं आंध्र प्रदेश और ओडिशा में दो ट्रेनों को शारिरिक रूप से अक्षम लोगों के अनुकूल बनाने के लिए उनमें फोल्डेबल रैंप लगवाने के साथ डिब्बे के अंदर व्हील चेयर लगवा दीं। फिर रेलवे ने मुंबई सेंट्रल स्टेशन पर भी रैंप बनवा दिया। इसके बाद विराली ने सोशल मीडिया पर #FlyWithDignity अभियान छेड़ा है ताकि हवाई अड्डों पर अक्षम लोगों के साथ केंद्रीय औद्योगिक सुरक्षा बल के सुरक्षाकर्मी उचित व्यवहार करें।
Read the full article