ग्राम पंचायत रोहद, जखौदा (झज्जर) व अन्य लोग पहुँचे संत रामपाल जी महाराज जी से आशीर्वाद लेने। गांव में पाइप पहुंचाने पर धन्यवाद किया।
संत रामपाल जी महाराज जी ने जीता जनता का दिल।
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ग्राम पंचायत रोहद, जखौदा (झज्जर) व अन्य लोग पहुँचे संत रामपाल जी महाराज जी से आशीर्वाद लेने। गांव में पाइप पहुंचाने पर धन्यवाद किया।
संत रामपाल जी महाराज जी ने जीता जनता का दिल।
बड़ौदा, जींद गांव के जैन समाज ने संत रामपाल जी महाराज जी को किया सम्मानित। बताया कि आप इतने सामाजिक और धार्मिक कार्य कर रहे जिनका कोई मुकाबला नहीं। संत रामपाल जी महाराज जी ने जीता जनता का दिल।
तीनों गुण क्या है जानने के लिए आवश्यक पढ़िए पवित्र पुस्तक ज्ञान गंगा
गीता जी के अध्याय 17 श्लोक 23 में वर्णित ओम तत सत का क्या राज है जाने इस रहस्य को हैरतअंगेज पुस्तक ज्ञान गंगा से
In Devi Puran, Third Skand,
Shri Vishnu ji himself confesses that - I (Vishnu),Brahma and Shankar are mortal. We take birth(Aavirbhaav) and die (Tirobhaav).
➡️ Read Gyan Ganga📗
यीशु जी की जन्म-मृत्यु पहले ही निर्धारित थी*
हजरत यीशु का जन्म तथा मृत्यु व जो भी चमत्कार किए वे पहले ही ब्रह्म (यहोवा) के द्वारा निर्धारित थे ताकि उसके भेजे अवतार की महिमा बनी रहे और जब पूर्ण परमेश्वर का संदेशवाहक आये तो कोई उसका विश्वास न करें
प्रमाण के लिए देखें- पवित्र बाइबल यूहन्ना 9:1-34 में
इस होली पर हमें वास्तविक राम नाम की होली के बारे में जानना होगा। जिससे हमारे सभी दुख टलेंगे, सर्व सुख तथा पूर्ण मोक्ष की प्राप्ति होगी।
गरीबदास जी महाराज का 61 वर्ष की आयु में सतलोक गमन
गरीबदासजी महाराज ने 61 वर्ष की आयु में सन 1778 में सतलोक गमन किया। ग्राम छुड़ानी में शरीर का अंतिम संस्कार किया गया। वहाँ एक यादगार छतरी साहेब बनी हुई है। इसके बाद उसी शरीर में प्रकट होकर सहारनपुर उत्तरप्रदेश में 35 वर्ष रहे। वहाँ भी उनके नाम की यादगार छतरी बनी हुई है ।
संत गरीबदास जी का जन्म गाँव-छुड़ानी, जिला-झज्जर, हरियाणा में सन् 1717 (विक्रमी संवत् 1774) में हुआ। सन् 1727 फाल्गुन सुदी द्वादशी के दिन के लगभग 10 बजे परमात्मा गरीबदास जी को नला नामक खेत में मिले सर्व ज्ञान कराया सतलोक लेकर गए और पृथ्वी पर वापस छोड़ा। तब गरीबदास जी ने बताया कि काशी में जो 120 वर्ष कबीर जुलाहा की भूमिका करके गए वह स्वयं परमात्मा हैं।
जिस कूं कहते कबीर जुलाहा । सब गति पूर्ण अगम अगाहा।।
पवित्र कुरान में पुनर्जन्म संबंधित प्रकरण
सूरः अल बकरा-2 की आयत नं. 243:-
तुमने उन लोगों के हाल पर भी कुछ विचार किया जो मौत के डर से अपने घर-बार छोड़कर निकले थे और हजारों की तादाद में थे। अल्लाह ने उनसे कहा मर जाओ। फिर उसने उनको दोबारा जीवन प्रदान किया। हकीकत यह है कि अल्लाह इंसान पर बड़ी दया
करने वाला है। मगर अधिकतर लोग शुक्र नहीं करते।
#sant rampal ji maharaj
*सनातन के नाम पर हिंदुओं से हुआ धोखा*
कृष्ण व काल ब्रह्म का भेद ना जानने के कारण आचार्य प्रशांत जी ने गीता अध्याय 4 श्लोक 5 के माध्यम से कृष्ण को सर्वज्ञ, निराकार ब्रह्म एवं उत्पत्ति कर्ता कहा है।
जबकि सूक्ष्मवेद (कबीर वाणी) में वर्णित तत्त्वज्ञान के साथ साथ गीता, वेद, पुराण, कुरान आदि ग्रंथों से संत रामपाल जी ने प्रमाणित किया है कि गीता का ज्ञान वासुदेव पुत्र श्रीकृष्ण ने नहीं बल्कि काल ब्रह्म ने दिया था। (प्रमाण - अध्याय 11 श्लोक 32 व श्लोक 47)
वहीं यह भी प्रमाणित किया है कि स्वयं गीता ज्ञान दाता काल ब्रह्म एवं उनका ब्रह्मलोक अविनाशी नहीं हैं अर्थात जन्म मृत्यु के अंतर्गत नाशवान हैं। वहीं काल ब्रह्म ने गीता के अनेक श्लोकों में अपने से अन्य सबका धारण पोषण करने वाले एक अविनाशी परमात्मा की महिमा की है। (प्रमाण - गीता अध्याय 10 श्लोक 2, अध्याय 2 श्लोक 12, अध्याय 4 श्लोक 5 व 9, अध्याय 8 श्लोक 16)
सनातन के नाम पर अज्ञानता न फैलाएं
आचार्य प्रशांत जी के अनुसार मूर्ति पूजा और पाखंड कर्मकांड का आजीवन विरोध करने वाले कबीर साहेब जी केवल उच्च कोटि के कवि, संत, भक्त और समाज सुधारक थे।
जबकि तत्त्वदर्शी संत रामपाल जी महाराज ने गीता, वेद, कुरान, बाईबल, गुरुग्रंथ साहिब, सूक्ष्मवेद व अनेक महापुरुषों की वाणियों से यह सिद्ध कर दिया है कि 600 साल पहले काशी में एक गरीब जुलाहे की लीला करने वाले कबीर साहेब जी केवल एक कवि या भक्त संत नहीं बल्कि पूर्ण परमात्मा भी थे, हैं और हमेशा परमात्मा रहेंगे।
हिन्दू धमर्गुरू व प्रचारक आचार्य, शंकराचार्य तथा गीता मनीषी गीता ज्ञान देने वाले (जिसे ये श्री विष्णु का अवतार श्री कृष्ण कहते हैं) को अविनाशी बताते हैं। कहते हैं इनका जन्म-मृत्यु नहीं होता।
इनके कोई माता-पिता नहीं।
आप देखें स्वयं (गीता अध्याय 2 श्लोक 12)
हे अर्जुन! ऐसा नहीं है कि मैं-तू तथा ये सब राजा व सैनिक पहले नहीं थे या आगे नहीं होंगे। अर्थात मैं (गीता ज्ञान दाता) तू (अर्जुन) तथा ये सब सैनिक आदि-आदि सब पहले भी जन्मे थे, आगे भी जन्मेंगे।
- जगतगुरु तत्वदर्शी संत रामपाल जी महाराज जी को
हिंदुओं के साथ धोखा
राधास्वामी, जय गुरुदेव, निरंकारी आदि पंथ तथा आसाराम, राम रहीम, देवकीनंदन, अनिरुद्ध आचार्य, इत्यादि संत कहते हैं कि पाप कर्म तो भोगना ही पड़ेगा।
जबकि जगतगुरु तत्वदर्शी संत रामपाल जी महाराज यजुर्वेद अध्याय 5 मंत्र 32, अध्याय 8 मंत्र 13 से प्रमाणित करके बताते हैं कि पूर्ण परमात्मा पाप कर्म को भी काट देता है।