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International Gita Mahotsav London, UK *यूनिवर्सिटी कॉलेज लंदन के लॉगन हाल में गीता पर हुआ इंटरनेशनल सेमिनार* *1500 अप्रवासी भारतीयों ने लिया इंटरनेशनल गीता महोत्सव में हिस्सा* #kdb #kurukshetra #london #southhall #loganhall #universitycollegelondon #Internationalgitamahotsav #Haryana #India #CMOHaryana #PMOIndia #parliamentSquare #AbingdonStreet #Westminster #ImperialwarMusem #Mayfair #kurukshetradevelopmentboard #gitamahotsav #houseofloards #Bloomsbury #BedfordWay #UK #whitechapel #Enfield #Edgware #thebritishMusem #GOI #IndianEmbassy #BritishEmbassy #centrallondon https://www.instagram.com/p/B1BtbrxlpQs/?igshid=1b9ale73iw7wp
त्रिगुणानन्द तीर्थ, गुनियानाण् त्रिगुणानन्द नामक यह तीर्थ करनाल से लगभग 31 कि.मी. दूर गुनियाना ग्राम में स्थित है। लौकिक आख्यान इस तीर्थ का सम्बन्ध सात प्रमुख महर्षियों भारद्वाज, जमदग्नि, कश्यप, विश्वामित्र, वशिष्ठ एवं अत्रि में से एक गौतम ऋषि से जोड़ते हैं। प्रचलित जनश्रुति के अनुसार इसी स्थान पर महर्षि गौतम ने तपस्या की थी। महाभारत में उपलब्ध वर्णन के अनुसार महर्षि गौतम का अन्यान्य ऋषियों के साथ अर्जुन के जन्मोत्सव पर शुभागमन हुआ था। द्रोण पर्व में ऐसा उल्लेख मिलता है कि इन्होंने महाभारत युद्ध में भीषण नरसंहार को रोकने के लिए आचार्य द्रोण के पास जाकर उनसे युद्ध बन्द करने को कहा था। महर्षि गौतम ने पारियात्र नामक पर्वत पर साठ सहस्र वर्षों तक कठिन तपस्या की थी। रामायण में भी इन ऋषि का विशेष वर्णन है। इन्होंने अपनी पत्नी अहिल्या को शिला होने का श्राप दिया था जिसका बाद मंे श्रीराम के पवित्र चरणारविन्द के स्पर्श से उद्धार हुआ। महाभारत में शरद्वान एवं चिरकारी नामक इनके दो पुत्रों का उल्लेख है। रामायण एवं महाभारत में उल्लेखित यह तीर्थ 48 कोस कुरुक्षेत्र भूमि के महत्त्वपूर्ण तीर्थों में से एक है। इस तीर्थ पर शिवरात्रि के अवसर पर भारी मेला लगता है। तीर्थ पर एक सरोवर है जिसके पश्चिमी तट पर एक सुन्दर लाखौरी ईंटों व मेहराबों से सुसज्जित प्रवेश द्वार है। प्रवेश द्वार से घाट की प्रथम सीढ़ी वाले तल पर दोनों ओर दो दो मेहराबी कक्षों का निर्माण हुआ है। सरोवर पर स्थित घाट में उत्तर मध्यकालीन अष्टकोण आकृति वाली बुर्जियाँ हैं। #kurukshetradevelopmentboard #kdb https://www.instagram.com/p/B0cX6luFSjp/?igshid=ys4dl8lj2cvt
पावन तीर्थ, उपलाना पावन नामक यह तीर्थ करनाल से लगभग 36 कि.मी. दूर करनाल-असन्ध मार्ग पर स्थित उपलाना ग्राम में है। इस तीर्थ का नाम एवं महत्त्व महाभारत वन पर्व केे 83वें अध्याय में स्वस्तिपुर नामक तीर्थ के पश्चात् वर्णित है: पावनं तीर्थमासाद्य तर्पयेत्पितृदेवताः। अग्निष्टोमस्य यज्ञस्य फलं प्राप्नोति भारत।। (महाभारत, वन पर्व, 83/175) अर्थात् हे भारत! पावन तीर्थ में जाकर देवताओं एवं पितरों का तर्पण करने वाला मनुष्य अग्निष्टोम के फल को प्राप्त करता है। महाभारत में ही अनुशासन पर्व के अन्तर्गत पावन की गणना विश्वदेवों में की गई है: विश्वे चाग्निमुखादेवाः संख्याताः पूर्वमेव ते। तेषां नामानि वक्ष्यामि भागार्हाणां महात्मनाम्।। बलं धृतिविपापात्मा च पुण्यकृत्पावनस्तथा। पाष्र्णिक्षेेमासमूहश्च दिव्यसानुस्तथैव च।। (महाभारत, अनुशासन पर्व 29-30) उपरोक्त श्लोक से स्पष्ट है कि पुण्यकृत पावन भी एक प्रमुख विश्वदेव है। लोक प्रचलित श्रुति इसे पाण्डवों के समय का तीर्थ बताती है। यहाँ के लोगों में ऐसी मान्यता पाई जाती है कि यहाँ आने पर श्रद्धालुजनों की मनोकामनाएं पूर्ण होती हैं। ग्रामीण निवासी इस तीर्थ को गोपालमोचन कहते हैं। #48kos #haryana #placetovisit #temples #Pilgrimages #karnal #jind #panipat https://www.instagram.com/p/B0ajdA7FaPt/?igshid=jkmthxan54fp
जम्बूनद तीर्थ, जबाला जम्बूनद नामक यह तीर्थ करनाल से लगभग 38 कि.मी. दूर करनाल-असन्ध मार्ग पर स्थित जबाला ग्राम में स्थित है। पौराणिक साहित्य में सम्पूर्ण पृथ्वी को सात द्वीपों में विभक्त होने से ‘सप्तद्वीप पृथ्वी’ अथवा सप्तद्वीपवसुमती के नाम से उल्लिखित किया गया है। ये सात प्रमुख द्वीप जम्बू, प्लाक्ष, शाल्मलि, कुश, क्रौंच, शक एवं पुष्कर हंै। जम्बू नामक द्वीप सभी द्वीपों के मध्य में स्थित है। महाभारत एवं पुराणों में जम्बूमार्ग तीर्थ का उल्लेख आता है। सम्भवतः यही जम्बूमार्ग तीर्थ कालान्तर में जम्बूनद नाम से प्रसिद्ध हुआ होगा। महाभारत में इस तीर्थ का महत्त्व इस प्रकार वर्णित है। जम्बूमार्गं समाविश्य देवर्षिपितृसेवितम् । अश्वमेधमवाप्नोति सर्वकामसमन्वित: ।। तत्रोष्य रजनीः पंचपूतात्मा जायते नरः । न दुर्गतिमवाप्नोति सिद्धिं प्राप्नोति चोत्तमाम्।। (महाभारत, वन पर्व 82/41-42) अर्थात् देवताओं, ऋर्षियों एवं पितरों द्वारा सेवित जम्बूूमार्ग नामक तीर्थ में जाने पर मनुष्य अश्वमेध यज्ञ का फल प्राप्त करता है और उसकी सभी मनोकामनाएं पूर्ण होती हैं। जो मनुष्य उक्त तीर्थं में पाँच रात्रियों तक निवास करता है वह विशुद्धात्मा होकर श्रेष्ठ सिद्धियों को प्राप्त करता है। महाभारत के अतिरिक्त इस तीर्थ का महत्त्व अग्नि पुराण, वायु पुराण तथा कूर्म पुराण में भी वर्णित है। अग्नि पुराण और कूर्म पुराण में इसका उल्लेख जम्बूकेश्वर नाम से है जहाँ व्यास देव ने भी इस तीर्थ को उत्तम मान कर इसका सेवन किया था। #48kos #haryana #placetovisit #temples #Pilgrimages #karnal #jind #panipat https://www.instagram.com/p/B0ai6kiFmZx/?igshid=1nby65ci07c3o